कमला नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की ओर से कराए जा रहे हॉस्टल निर्माण पर वन भूमि पर अवैध कब्जेदारी का मामला फिर उठा है। कमला नेहरू ट्रस्ट के सचिव व पूर्व मंत्री विनोद सिंह ने डीएफओ को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है।
उन्होंने केएनआईटी की ओर से कराए जा रहे निर्माण में पट्टे की शर्त के उल्लंघन का आरोप लगाया है। शहर के समीप स्थित कमला नेहरू इंस्टीट्यूट (केएनआईटी) की ओर से कराए जा रहे हॉस्टल निर्माण पर अवैध कब्जेदारी का मामला फिर उठा है।
पूर्व मंत्री व कमला नेहरू मेमोरियल ट्रस्ट के सचिव विनोद सिंह ने केएनआईटी की ओर से कराए जा रहे हॉस्टल का निर्माण ट्रस्ट को लीज पर मिली वनभूमि के बीच में अवैध रूप से कराने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट को 146 बीघा वन भूमि पट्टे पर मिली है। इसके मध्य में स्थित वन भूमि पर केएनआईटी की ओर से अवैध रूप से हॉस्टल का निर्माण कराया जा रहा है।
उनका आरोप है कि यदि यह भूमि पट्टे की है तो उस पर निर्माण में शर्तों का उल्लंघन किया जा रहा है। शासन ने पट्टे की भूमि पर करीब दो तिहाई हिस्से में पौधरोपण करने एवं शेष भूमि पर निर्माण की शर्त रखी है। इसके विपरीत निर्माण मेें पट्टे की शर्त का भी उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने डीएफओ से निर्माण रोकवाने एवं हस्तक्षेप की मांग की है। इनसेट वन विभाग से अनुमति के बाद कराया जा रहा निर्माण केएनआईटी के निदेशक रघुराज सिंह का कहना है कि हॉस्टल का निर्माण वन विभाग से अनुमति लेकर पट्टे की शर्तों के अनुसार कराया जा रहा है।
कहीं अवैध कब्जेदारी व शर्तों के उल्लंघन का मामला निर्माण में नहीं है। इनसेट प्रथम दृष्टया निर्माण गलत नहीं डीएफओ केसी बाजपेयी का कहना है कि प्रथम दृष्टया केएनआईटी की ओर से निर्माण में अवैध कब्जेदारी व शर्तों के उल्लंघन का मामला नहीं पाया गया है। निर्माण के बाद पौधरोपण होगा। प्रकरण को फिर दिखवाया जाएगा।