सुल्तानपुर। सुल्तानपुर-वाराणसी फोर लेन निर्माण के लिए अधिग्रहीत काश्तकारों की भूमि में मुआवजा वितरण, निर्धारण के साथ सूची बनाने में भी खेल सामने आया है। संयुक्त खाते की अधिग्रहीत भूमि के गजट प्रकाशन में काश्तकारों का नाम पाया गया है लेकिन कलेक्ट्रट में तैयार मुआवजा सूची से कई सहखातेेदारों का नाम गायब है।
एक-एक गांव के कई काश्तकारों के मुआवजे से वंचित होने के बाद अधिग्रहण में ही पेंच फंसता जा रहा है। मुआवजा नहीं मिलने की दशा में काश्तकार कोर्ट पहुंच सकते हैं।
सुल्तानपुर-वाराणसी फोर लेन के लिए अधिग्रहीत भूमि में कलेक्ट्रेट के संबंधित कर्मचारियों की मनमानी सामने आ रही है। उन्होंने मुआवजा निर्धारण, वितरण में कई करोड़ रुपये का हेरफेर करने के साथ ही मुआवजा सूची बनाने में भी गड़बड़ी कर डाली। राजस्व रिकॉर्डों के मुताबिक अधिग्रहीत भूमि का प्रकाशन तो सरकार के गजट में कर दिया लेकिन काश्तकारों की मुआवजा सूची बनाते समय कई सहखातेदारों का नाम सूची से गायब कर दिया गया।
मुआवजा सूची से सहखातेदारों का नाम गायब होने से उनकी भूमि तो अधिग्रहीत कर ली गई लेकिन वे मुआवजे से वंचित हो गए। गजट में प्रकाशन के बाद मुुआवजा राशि बैंक खाते में नहीं पहुंचने के बाद मामले का खुलासा हुआ है। लंभुआ के पन्नाटिकरी गांव निवासी शत्रुघ्न, सदानंद, परमानंद, प्रह्लाद आदि की शिकायत के बाद मामला सामने आया है।