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जिला अस्पताल की बिजली कटने से हड़कंप

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जिला अस्पताल में ठप रहा इलाज, परेशान हुए मरीज
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सुल्तानपुर। पांच करोड़ 36 लाख 32 हजार रुपये विद्युत बिल बकाया अदा न करने पर काटी गई जिला अस्पताल की बिजली से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। बिना नोटिस बिजली काटे जाने से नाराज चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों ने शनिवार सुबह आठ बजे ओपीडी समेत इमरजेंसी सेवाएं ठप कर कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया।

इससे जिला प्रशासन में अफरातफरी मच गई। सीएमएस ने सीडीओ व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से वार्ता कर एक्सईएन से बात की। एक हफ्ते में बकाया बिल जमा करने के आश्वासन पर बिजली जोड़ी गई। डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार से मरीजों को काफी परेशानी हुई।
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बिजली के बकाएदारों के खिलाफ कार्रवाई की कड़ी में पावर कॉर्पोरेशन ने शुक्रवार को 25 विभागों की बिजली काट दी थी। देर शाम जिला अस्पताल का नंबर भी आ गया। जिला अस्पताल पर बिल के पांच करोड़ 36 लाख 32 हजार रुपये बकाया है। बिजली गुल होने पर पहले तो लोगों ने समझा कि रूटीन कटौती होगी, लेकिन घंटों बिजली नहीं आने के बाद पावर कॉर्पोरेशन की कार्रवाई की जानकारी हुई। बिजली कटने से जिला अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। सबसे ज्यादा परेशानी वार्डों में भर्ती मरीजों को उठानी पड़ी।

दूसरी ओर जिला अस्पताल परिसर में रहने वाले चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों के परिवारीजन भी पानी व हवा के लिए तरसते नजर आए। बीच-बीच में जनरेटर चलाकर रात में किसी तरह काम चलाया गया। शनिवार सुबह जिला अस्पताल के सभी चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों ने ओपीडी व इमरजेंसी सेवा बंद कर कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। जिला अस्पताल में चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मियों के कार्य बहिष्कार से हड़कंप मच गया। इसकी जानकारी होने पर जिला प्रशासन के अधिकारी हरकत में आए। सीएमएस डॉ. योगेंद्र यति ने सीडीओ राधेश्याम के साथ ही स्वास्थ्य महानिदेशक को अवगत कराया।
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सीएमएस ने एक्सईएन बालकृष्ण से बात कर उन्हें आश्वासन दिया कि एक हफ्ते में बकाया का बिल जमा करा दिया जाएगा। इसके बाद 11.30 जिला अस्पताल की बिजली जोड़ी गई। करीब चार घंटे तक ओपीडी बंद रहने से मरीजों को काफी परेशानी हुई। मरीज इलाज के अभाव में इधर-उधर भटकते रहे। करीब साढ़े 11 बजे कार्य बहिष्कार समाप्त कर चिकित्सक काम पर लौटे। तब जाकर मरीजों ने राहत की सांस ली।
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