विकास विभाग से जुड़े करीब 50 कर्मचारियों ने समय से पहले अपने वेतनमान का निर्धारण कराकर सरकारी खजाने को करीब डेढ़ करोड़ रुपये की चोट पहुंचाई है। आंतरिक लेखा परीक्षक की जांच में मामला पकड़ में आने के बाद कर्मचारियों में खलबली मची है।
आंतरिक लेखा ने समय से पहले वेतनमान का निर्धारण कर सरकार का धन हड़पने वाले कर्मचारियों से वसूली व उनके खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है। वेतनमान गलत निर्धारण करवाने में सहायक लेखाकार व उर्दू अनुवादक शामिल हैं।
विकास विभाग से जुड़े करीब 50 कर्मचारियों ने समय से पहले अपने वेतनमान का निर्धारण करवाकर सरकारी खजाने को करीब डेढ़ करोड़ रुपये की चोट पहुंचाई है। इसमें सर्वाधिक सहायक लेखाकार व उर्दू अनुवादक के पदों पर कार्यरत कर्मचारी बताए जा रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो इसमें कुछ ऐसे कर्मचारी जिन्होंने दो-दो बार अपने वेतनमान का गलत निर्धारण करवाकर समय से पहले बढ़ा हुआ वेतन व एरियर ले लिया। ऑडिट में आंतरिक लेखा परीक्षक की टीम ने कर्मचारियों की ओर से गड़बड़ी कर सरकारी खजाने से वेतन व एरियर के नाम पर हड़पी गई करीब डेढ़ करोड़ रुपये की धनराशि का मामला पकड़ा है।
जांच में मामले की पुष्टि होने के बाद आंतरिक लेखा परीक्षक ने जिला विकास अधिकारी को पत्र भेजकर एरियर व बढ़ा वेतन लेने वाले कर्मचारियों से हड़पी धनराशि की वसूली का निर्देश दिया है।
गड़बड़ी करवाकर बढ़ा वेतन व एरियर लेने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का भी निर्देश दिया है। इसकी एक प्रति ग्राम्य विकास आयुक्त को भेजकर प्रकरण से अवगत करा दिया है। सूत्रों की मानें तो एक-एक कर्मचारियों से दो से तीन लाख लाख रुपये तक की वसूली की तलवार लटक रही है।