सुल्तानपुर। जानलेवा हमले के मामले में धारा हटाने के पुलिस के कार्य को कोर्ट ने गलत माना है। सीजेएम बटेश्वर कुमार ने जानलेवा हमले की धारा हटाकर केवल मारपीट, बलवा व गाली देने के आरोप में दाखिल पुलिस की चार्जशीट को निरस्त कर दिया है। सीजेएम ने मामले की अग्रिम विवेचना कराने का आदेश देते हुए इसकी प्रति एसपी व नगर कोतवाल के पास भेजी है। कोर्ट ने विवेचना तीन माह में पूरी कर इसकी रिपोर्ट भी तलब की है।
अधिवक्ता अमित पांडेय के मुताबिक नगर कोतवाली क्षेत्र के तुराबखानी गांव निवासी इसरार हुसैन ने 11 सितंबर 2023 को गांव के ही मो. सकलेन, मो.सिफ्लेन, अली हसनैन, अली मोहम्मद, मो. सलमान और शहंशाह के खिलाफ जानलेवा हमले का केस दर्ज कराया था। इसरार हुसैन का आरोप है कि गांव के जफर की दुकान पर बैठे उनके पुत्र इमरान हुसैन पर आरोपियों ने लाठी, डंडा और लोहे की रॉड से जानलेवा हमला कर उसे घायल कर दिया था।
इस दौरान बीचबचाव करने पर वादी के पुत्र फरमान व आले नवी को भी चोटें आई थीं। पुलिस ने इस मामले से जानलेवा हमले की धारा हटा दी थी और केवल मारपीट, बलवा व गाली देने के आरोप में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। इसका वादी मुकदमा इसरार हुसैन के अधिवक्ता अमित पांडेय ने विरोध किया। कहा कि पुलिस ने आरोपियों को राहत देने के लिए जानलेवा हमले की धारा हटाई है, जबकि इमरान को सिर में गंभीर चोटें आई थीं। सीजेएम ने साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पुलिस की चार्जशीट को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने एसपी को आदेश दिया है कि वे मामले की निष्पक्ष अग्रिम विवेचना किसी अन्य विवेचक से पूरी कराएं और इसकी रिपोर्ट तीन माह में अदालत में पेश कराना सुनिश्चित करें।