सुल्तानपुर। आरक्षण को लेकर विभिन्न संगठनों की ओर से किया गया भारत बंद का आह्वान बुधवार को बेअसर रहा। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के बाजार पूर्व की भांति खुले लेकिन विरोध प्रदर्शन की वजह से शहरवासियों को जाम से जूझना पड़ा। बंदी को सफल बनाने के लिए भीम आर्मी की ओर से शहर में जबरन दुकानें बंद कराने का प्रयास किया गया जिसे लेकर नोकझोंक भी हुई। हालांकि, पुलिस ने फटकार लगाते हुए प्रदर्शनकारियों को भगा दिया।
एससी-एसटी आरक्षण पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में भारत बंद के किए गए आह्वान पर बुधवार को विभिन्न आरक्षण समर्थक संगठन सड़क पर उतर पड़े। आवास विकास कॉलोनी से राहुल चौराहा, शाहगंज, चौक, मेडिकल कॉलेज, डाकखाना चौराहा, दीवानी तिराहा व बस स्टेशन होते हुए विकास भवन के पास पहुंचे।
एसडीएम सदर विपिन द्विवेदी व सीओ सिटी शिवम मिश्र ने उनसे ज्ञापन लेना चाहा लेकिन आरक्षण समर्थक कलेक्ट्रेट के पहले ज्ञापन न देने पर अड़े रहे। इसे लेकर करीब 20 मिनट तक प्रशासन व आरक्षण समर्थकों सुरेश कुमार गौतम, आरके बौद्ध, हौसिला प्रसाद भीम, श्यामलाल तिलकधारी के बीच बातचीत होती रही। अंत में प्रशासन ने उन्हें कलेक्ट्रेट गेट तक आने की इजाजत दी। इसके बाद विभिन्न संगठनों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम सदर को सौंपा। कुड़वार में भी जुलूस निकाला गया।
इस दौरान बस स्टेशन से लेकर डाकखाना चौराहा, दीवानी तिराहा समेत अन्य मार्गों पर लोग जाम से जूझते रहे। जाम में कुछ छात्र भी फंसे रहे। हालांकि, दोपहर डेढ़ बजे आंदोलन समाप्त होने के बाद दो बजे तक आवागमन कुछ सामान्य हो सका।
भारत बंद को देखते हुए कलेक्ट्रेट के साथ ही विभिन्न जगहों पर बड़ी संख्या में पुलिस तैनात रही। दर्जनों पुलिस कर्मी जुलूस के साथ चल रहे थे। ज्ञापन देने वालों में बसपा, आंबेडकर कल्याण समिति, सपा व कांग्रेस का अनुसूचित प्रकोष्ठ, डॉ. भीमराव आंबेडकर अधिवक्ता संघ, मोस्ट कल्याण संस्थान, आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, अखिल भारतीय संत गाडगे मिशन, ऑल इंडिया रेलवे अनुसूचित जाति यूनियन समेत अन्य संगठन शामिल रहे।
पुलिस ने डपटा तो पीछे हटे कार्यकर्ता
भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने शहर में कुछ जगहों पर जबरन दुकानों को बंद कराने का प्रयास किया। उनके प्रयास पर कुछ दुकानदारों ने अपनी दुकानें थोड़ी देर बंद करने के बाद फिर खोल दीं। शाहगंज चौराहे पर भी कार्यकर्ताओं ने दुकानें बंद करने के लिए दुकानदारों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। इस पर दुकानदारों के साथ ही पुलिस से भी उनकी नोकझोंक हो गई। पुलिस ने डपटा तो कार्यकर्ता पीछे हट गए।