सेमरीबाजार (सुल्तानपुर)। 10 से 18 साल तक के किशोर-किशोरियों की समस्याओं के मार्गदर्शन के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाई गई अर्श योजना (किशोर प्रजनन और यौन स्वास्थ्य) फर्श पर आ गई है। बिरसिंहपुर के 100 बेड अस्पताल की अर्श क्लीनिक पर ताला लटका है। यहां अभी तक किसी चिकित्सक या काउंसलर की तैनाती नहीं की गई है। ऐसे में मानसिक अवसाद और नशे की बुरी आदतों के चंगुल में फंसे युवाओं की काउंसलिंग नहीं हो पा रही है।
जयसिंहपुर के बिरसिंहपुर 100 बेड अस्पताल में अर्श क्लीनिक का एक कमरा बना है। यहां अभी तक किसी चिकित्सक या काउंसलर की नियुक्ति नहीं हो पाई है। इससे अर्श क्लीनिक पर ताला लटका रहता है। युवाओं का मार्गदर्शन करने वाली अर्श योजना फ्लॉप हो रही है। अस्पताल प्रबंधन भी इसको सफल बनाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। हालत यह है कि अर्श ओपीडी में ताला लटका देखकर युवा मायूस होकर लौट जाते हैं।
अर्श योजना के तहत चिकित्सक या पैरामेडिकल स्टाफ किशोर-किशोरियों को यौन उत्पीड़न, मानसिक अवसाद, मादक पदार्थों के सेवन व आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोकने और जीवन की चुनौतियों का सामना करने को प्रेरित करने के साथ उनका मार्गदर्शन करते हैं। इस दौरान किशोर-किशोरियों के साथ की गई बातचीत, जांच व इलाज की सारी जानकारी को पूर्णत: गोपनीय रखा जाता है।
अर्श योजना के बारे में युवाओं से बातचीत करने पर पता चला कि अधिकांश युवाओं को योजना से संबंधी कोई भी जानकारी नहीं है। इसका बड़ा कारण प्रचार का अभाव है। सीएमएस डॉ. राजकमल चौरसिया ने बताया कि अर्श क्लीनिक के लिए चिकित्सक और काउंसलर की मांग की गई है।