सुल्तानपुर। कमला नेहरू भौतिक एवं सामाजिक विज्ञान संस्थान के कृषि संकाय के विद्यार्थी स्ट्रॉबेरी की खेती करना सीख रहे हैं। विद्यार्थियों को इस नकदी खेती के गुर प्रशिक्षकों की ओर से सिखाए जा रहे हैं।
संस्थान के फरीदीपुर स्थित कृषि प्रक्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की खेती की जा रही है। उद्यान विभाग के प्राध्यापक डॉ. अंशुमान सिंह ने विद्यार्थियों को बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए बहुत लाभदायक है। जिले में स्ट्रॉबेरी की खेती बहुत कम हो रही है। इसकी खेती अन्य फसलों की तुलना में अधिक मुनाफे वाली है।
स्ट्रॉबेरी में विटामिन सी से लेकर फोलिक एसिड, कैल्सियम और फॉस्फोरस जैसे कई खनिज तत्व पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं। विद्यार्थी स्ट्रॉबेरी की खेती का प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने खेतों में इसका उत्पादन कर सकते हैं। साथ ही अन्य किसानों को भी इस नकदी खेती के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
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सबसे उपयुक्त है बलुई मिट्टी
प्राध्यापक डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि स्ट्रॉबेरी शीतोष्ण जलवायु की फसल है। इसमें कुछ प्रजातियां जैसे कामरोजा, विंटर डाउन और स्वीट चार्ली उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु में अच्छा उत्पादन दे रही हैं। इसकी खेती के लिए 20 से 30 डिग्री तापमान उपयुक्त है। स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए जलनिकास वाली बलुई मिट्टी सबसे उपयुक्त है।
स्ट्रॉबेरी की रोपाई अक्तूबर से नवंबर माह में की जाती है। एक पौधे से 800 से 900 ग्राम फल प्राप्त हो सकते हैं। प्राचार्य प्रो. आलोक कुमार सिंह ने कृषि प्रक्षेत्र में हो रही स्ट्रॉबेरी की खेती का अवलोकन करने के साथ प्राध्यापकों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के किसानों को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। ताकि किसानों की आर्थिक समृद्धि का आधार स्ट्रॉबेरी की खेती बने।
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शुरू हुआ शहद का उत्पादन
फोटो संख्या-29
सुल्तानपुर। केएनआई के कृषि संकाय की ओर से मधुमक्खी पालन कराया जा रहा है। बुधवार को शहद उत्पादन की पहली लॉट निकाली गई। प्राचार्य प्रो. आलोक कुमार सिंह ने कहा कि शुद्घ शहद का यह उत्पादन छात्र-छात्राओं के नियमित पठन-पाठन के साथ-साथ स्टार्टअप इंडिया के तहत एक नया रिसर्च भी है। संस्थान के कृषि छात्रों की ओर से उत्पादित शहद मार्केट में बेचा जाएगा। इस मौके पर कीट विज्ञान के अध्यक्ष डॉ. नवीन विक्रम समेत कई प्राध्यापक मौजूद रहे। (संवाद)