अमेठी। विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की ओर से उठाए गए किशोरी दुष्कर्म मामले पर जवाब देते हुए सभापति ने भले ही विवेचक बदलने की व्यवस्था देने की बात कही लेकिन उस पर अमल अब तक नहीं हुआ। सभापति विधान परिषद द्वारा दी गई व्यवस्था सार्वजनिक होने के बाद मौजूदा विवेचक जहां ढीले पड़ गए हैं वहीं सीओ की गिरफ्तारी न होने से पीड़ित परिवार सहमा हुआ है। मुसाफिरखाना थाना क्षेत्र की एक किशोरी ने दो दिसंबर को स्थानीय सीओ पर दुष्कर्म के गंभीर आरोप लगाए थे। एसपी हीरालाल ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज करवाकर विवेचना एएसपी मुन्नालाल को सौंप। विवेचना प्रारंभ होने के साथ ही विवेचक पर पीड़िता व उसके परिवार को तंग करने और आरोपी सीओ को बचाने की कोशिश के आरोप लगने लगे। 10 दिसंबर को इस मामले को नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने विधान परिषद में उठाया। सिद्दीकी ने कहा कि मौजूदा विवेचक पर पीड़ित परिवार की ओर से लगाए जा रहे आरोपों और मामले की गंभीरता को देखते हुए विवेचना डीआईजी स्तर के अधिकारी से कराई जानी चाहिए। उन्होंने आरोपी सीओ को भी तत्काल गिरफ्तार कराने की मांग की। इसके जवाब में सभापति गणेश शंकर पांडेय ने विवेचना डीआईजी स्तर के अधिकारी से कराने की व्यवस्था दी थी। विधान परिषद में ही नेता सदन अहमद हसन ने कहा था कि सरकार पहले ही मामले की जांच डीआईजी से कराने का निर्णय ले चुकी है। सदन में प्रश्न उठने और नेता सदन की घोषणा के बावजूद अब तक न तो विवेचक बदला गया और न ही इस संबंध में एसपी कार्यालय को कोई पत्र ही मिला। लेकिन मौजूदा विवेचक ढीले जरूर पड़ गए हैं। एसपी हीरालाल ने बताया कि अब तक विवेचक बदलने संबंधी कोई पत्र कार्यालय को प्राप्त नहीं हुआ है।