सुल्तानपुर। उचित देखरेख के अभाव व कुपोषण से जिले में सैकड़ों बच्चे जन्म लेते ही दम तोड़ देते हैं। जन्म के बाद विभिन्न रोगों की चपेट में आने से मरने वाले बच्चों की संख्या भी सैकड़ों में है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग दो फीसदी शिशु मृत्यु दर कम होने का दावा कर रहा है लेकिन तस्वीर इससे इतर बताई जा रही है। दावा तो ग्राम पंचायत से लेकर ब्लॉक व जिला मुख्यालय तक टीकाकरण करने का किया जा रहा है लेकिन मौतों पर लगाम नहीं लग पाना इसे झुठला रहा है। बाल विकास से संचालित योजनाएं भी इस पर काबू नहीं पा सकी हैं। बच्चों के स्वास्थ्य की देखरेख और उन्हें पोषाहार देने के लिए जिले में 2511 आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए हैं। सभी पर आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों की तैनाती हुई। प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर एक या दो सहायिकाएं भी रखी गईं। टीकाकरण के लिए 2381 आशा बहू रखी गई हैं जो मानक से 156 कम बताई जा रही हैं। टीकाकरण का कार्य आशा बहुओं एवं कार्यकत्रियों के सहयोग से चलता है।