सुल्तानपुर। परिवहन निगम की सात बसें वर्कशॉप से निकलते ही एक के बाद एक बंद होने लगीं। बसों को दोबारा वर्कशाप में खड़ा कर टेक्निकल टीम से जांच कराई गई तो एक नया ही खेल उजागर हो गया। बसों के डीजल टैंक से 533 लीटर पानी निकला। यह मामला उजागर होने के बाद से परिवहन महकमे में हड़कंप मच गया है।
निगम के अमहट स्थित वर्कशॉप में 12 अगस्त को सात बसें विभिन्न रूटाें पर जाने के लिए डीजल भराने पहुंचीं। सातों में डीजल फिलिंग बाबू ने ईंधन भर दिया। इसके बाद बसें वर्कशॉप से गंतव्य की ओर रवाना हुईं तो अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई। एक के बाद एक बसें वर्कशॉप से थोड़ी दूर जाने के बाद बंद हो गईं। देखते ही देखते सातों बसें बंद हो गईं।
बसों के बंद होने की सूचना चालक व परिचालकों ने परिवहन निगम के अधिकारियों को दी। इसके बाद बसों को दोबारा वर्कशाप पहुंचाया गया। टेक्निकल टीम ने जब बसों की जांच की तो पता चला कि ईंधन टैंक में डीजल की जगह पानी भर दिया गया है। करीब 533 लीटर पानी निकला।
ऑयल टैंक में डीजल की जगह पानी मिलने का प्रकरण उजागर होने के बाद परिवहन महकमे में हड़कंप मच गया। इस प्रकरण को लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। कुछ रोडवेज कर्मियों ने बताया कि वर्कशाप से डीजल गायब किया जाता है।
डीजल पंप से डाला जाता हैं ईंधन
अमहट स्थित रायबरेली रोड पर परिवहन निगम का वर्कशॉप है। अधिकारी बताते हैं कि वर्कशॉप परिसर स्थित डीजल पंप से रोडवेज बसों में दूरी के हिसाब से डीजल डाला जाता है। इसके बाद चालक-परिचालक बस लेकर जाते हैं। कर्मचारी बताते हैं कि कई बसें वर्कशॉप से डीजल भरवाने के बाद सवारियां बैठाने के लिए निकलीं तो अचानक बंद हो गईं।
वर्जन
वर्कशॉप से निकले वाली बसों के टैंक में पानी मिलने का मामला संज्ञान में हैं। इस संबंध में वर्कशॉप के डीजल फिलिंग क्लर्क से जवाब-तलब किया गया है। उनके जवाब देने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रकरण उच्चाधिकारियों के संज्ञान में है।
- नागेंद्र पांडेय, एआरएम, सुल्तानपुर