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Sonebhadra News: लिखते हैं बाहर की दवा, प्लास्टर काटने के लिए भी लेते हैं पैसे

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सोनभद्र। जिला अस्पताल और मातृ शिशु इकाई में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल नहीं सुधर रहा। सोमवार को जब डीएम के औचक निरीक्षण किया तो मरीजों ने बाहर से दवा लिखे जाने की शिकायत की। प्लास्टर काटने के नाम पर अलग से धन मांगने का आरोप लगाया। इसकी पुष्टि भी हुई। इसपर डीएम ने मरीज का धन वापस कराते हुए चिकित्सक-कर्मचारियों के विरुद्ध चार्जशीट बनाकर प्रेषित करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी सबसे पहले जिला संयुक्त चिकित्सालय के नेत्र चिकित्सा कक्ष में पहुंचे। मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। इमरजेंसी कक्ष में पहुंचे तो एक मरीज ने बताया कि उसका पैर टूट गया है। प्लास्टर बांधा गया लेकिन प्लास्टर काटने के लिए फीस मांसी जाती है। डीएम ने संबंधित चिकित्सक को मरीज के सामने बुलाया तो शिकायत सही मिली।
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इसपर जिलाधिकारी ने चिकित्सक को चेतावनी दी। साथ ही मरीज से लिया गया धन भी वापस कराया। चिकित्सक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए सीएमओ को निर्देशित किया। एक महिला मरीज ने अस्पताल से बाहर की दवाओं को लिखने की शिकायत की। इस पर डीएम ने संबंधित फार्मासिस्ट के खिलाफ चार्जशीट तैयार कराने के निर्देश दिए। सीएमओ को निर्देशित किया कि मरीजों को अस्पताल से ही दवाएं उपलब्ध कराया जाए। उन्हें बाहर की दवा कदापि न लिखें, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सीएमओ को अस्पताल परिसर में साफ-सफाई के साथ ही बेहतर व्यवस्था का प्रबंध सुनिश्चित कराने को कहा। इस दौरान आयुष्मान कार्ड पर उपचार में लापरवाही, परिसर में मेडिकल स्टोर संचालन आदि की भी शिकायतें मिली। इस पर डीएम ने जांच कराकर कार्रवाई की बात कही।

दूसरे कार्य में खर्च कर दिया डीएमएफ का पैसा, जेई निलंबित
डीएम ने जिला खनिज निधि (डीएमएफ) से अस्पताल में कराए गए कार्यों का निरीक्षण किया तो पता चला कि शौचालय के टाइलीकरण, खिड़कियों को दुरुस्त कराने के कार्य के लिए पैसा स्वीकृत हुआ था। यह धनराशि दूसरे कार्य में खर्च कर दी गई है। इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए डीएम ने स्वास्थ्य विभाग के जेई को निलंबित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान सीएमएस डॉ. सीएपी सिन्हा, डीपीएम रिपुंजय श्रीवास्तव सहित अन्य अफसर मौजूद रहे।
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लापरवाह प्रबंधक पर दर्ज होगा मुकदमा
जिला अस्पताल परिसर में ही संचालित सौ बेड के मातृ-शिशु इकाई के निरीक्षण के दौरान डीएम ने शिशुओं के स्वास्थ्य सुविधा व उनकी देख-रेख, एंबुलेंस सेवा के रजिस्टर को देखा। एंबुलेंस के रोस्टर से मिलान किया तो एंबुलेंस संचालन में काफी गड़बड़ियां मिली। जच्चा-बच्चा के उपचार से जुड़े संवेदनशील मामले में शिथिलता बरतने पर कड़ी नाराजगी जताई। डीएम ने प्रबंधक को पदीय दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन न करने का जिम्मेदार ठहराते हुए उसके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए। प्रसव कक्ष के निरीक्षण के दौरान अस्पताल में तीमारदारों को बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं मिला। इस पर उन्होंने संबंधित को आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए, ताकि मरीजों के परिजनों को कोई परेशानी न हो सके।

दिन में एक बार ही होती है प्रसूताओं की जांच
डीएम ने प्रसूति महिलाओं को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधा की जानकारी ली तो पता चला कि प्रसूताओं का दिन में दो बार की बजाय एक ही बार स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। संबंधितों को कार्य में सुधार लाने के निर्देश देते हुए कहा कि लापरवाही बरतने वालों की जिम्मेदारी तय करते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने ड्यूटी में लगे चिकित्सक, नर्स, वार्ड ब्याव के ड्यूटी लिस्ट से मिलान कर जानकारी ली तो गार्ड राजीव पांडेय, प्रसन्न देव पांडेय अनुपस्थित पाए गए। इस पर स्पष्टीकरण प्राप्त करने के लिए सीएमओ को निर्देशित किया।
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