ज्येष्ठ मास की एकादशी पर बिना पानी पीए व्रत रहकर भक्तों ने सोमवार को श्रीहरि की आराधना की। मंदिरों में विधि विधान से पूजा पाठ करते हुए परिवार में मंगल की कामना की। श्रद्धालु मंगलवार को सुबह पारण करेंगे।
ज्योतिषाचार्य डॉ. एसएन तिवारी ने बताया कि ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी या भीमसेनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन बिना पानी पीए व्रत रखकर श्रीहरि की पूजा करने का विशेष फल मिलता है। वर्ष भर की सभी एकादशी से यह व्रत अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि निर्जला एकादशी व्रत करने से साल के सभी एकादशी व्रत का पुण्य प्राप्त हो जाता है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और कथा का श्रवण किया जाता है। बताया कि इस व्रत को धारण करने वाले को स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
श्रीहरि की कृपा से वह मोक्ष को प्राप्त करता है। सोमवार को सुबह श्रीरामजानकारी मंदिर पन्नूगंज रोड में भक्तों ने दर्शन पूजन किया। आचार्य सौरभ भारद्वाज ने बताया कि एकादशी व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। ये व्रत श्रीहरि विष्णु भगवान को समर्पित है।
कठोर नियमों के कारण यह व्रत सभी एकादशी के व्रतों में से सबसे कठिन है। शास्त्रों के अनुसार पांडव भाइयों में से भीम ने बिना जल ग्रहण किए निर्जला एकादशी का व्रत रखा था। इसके फल स्वरूप भीम को मोक्ष और लंबी आयु का वरदान मिला था।