चतरा ब्लॉक के पनिकप कला गांव में पित्त पक्ष पर पित्तरो को तर्पण करते लोग।
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15 दिन तक चलने वाले पितृपक्ष की शुरूआत मंगलवार से हो गई। पितृपक्ष के पहले दिन विधिपूर्वक लोगों ने पूजन कर अपने पूर्वजों का तर्पण किया। पहले गाय, श्वान और कौए को भोजन कराया। उसके बाद ब्राह्मण भोज कराया। जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलों में लोगों ने श्रद्धापूर्वक पितरों का श्राद्ध कर्म किया। आचार्य वेदप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि पितृपक्ष में पितरों का आगमन दक्षित दिशा से होता है। पितृपक्ष में वंशजों की तरफ से दिया गया हव्य ग्रहण करने के लिए पितृ धरती पर आते हैं। श्रद्धा के साथ ही पितरों का स्मरण करना ही श्राद्ध है। हिंदू संस्कृति में श्राद्ध का विशेष महत्व है। राबर्ट्सगंज नगर के रामसरोवर तालाब के साथ ही बढ़ौली पोखरा और अन्य तालाब व नदियों के किनारे लोगों ने श्राद्ध किया। इसी तरह रामगढ़, खलियारी, वैनी, शाहगंज, घोरावल, चोपन, रेणकुट सहित अन्य स्थानों पर लोगों ने पितरों के निमित श्राद्ध किया।