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Sonebhadra News: रेशम से मजबूत होगी महिलाओं की आर्थिक डोर

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सोनभद्र। रेशम का पतला और मुलायम धागा ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक मजबूती का आधार बनेगा। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को रेशम उत्पादन से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। राष्ट्रीय आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत महिलाओं को कोया (ककोन) से रेशम उत्पादन के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है। कुछ महिलाओं ने रेशम उत्पादन कार्य शुरू भी कर दिया है।
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रेशम विभाग की तरफ से जिले में दो दर्जन से अधिक रेशम उत्पादन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। पूर्वांचल में सर्वाधिक रेशम उत्पादन सोनभद्र जनपद में हो रहा है। जिले में रेशम कीट और ककोन दोनों माध्यम से रेशम उत्पादन किया जा रहा है। विभाग से ककोन खरीदते हुए प्राइवेट संस्था के माध्यम से मधुपुर क्षेत्र के बट गांव में रेशम तैयार कराया जा रहा है। रेशम उत्पादन के कार्यों में अब स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को जोड़ा जा रहा है। ताकि समूह की महिलाएं पार्ट टाइम काम करके अच्छी तरक्की कर सकें। इसके लिए समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, वहीं समूह की कुछ महिलाएं रेशम उत्पादन कार्यों में जुट भी गई है। बीते दिनों रेशम उत्पादन केंद्र का निरीक्षण करने आए रेशम विभाग के निदेश सुनील कुमार वर्मा ने बट गांव पहुंचकर समूह की महिलाओं की हौसलाफजाई की थी। उन्होंने अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं को काम देने के लिए निर्देशित भी किए।
रेशम विभाग से ककोन खरीदकर प्राइवेट संस्था की तरफ से बट गांव में रेशम उत्पादन का काम किया जा रहा है। इस कार्य में ग्रामीण महिलाएं शामिल हैं। - सूबेदार, एसडीओ-रेशम विभाग।
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समूह से जुड़ी महिलाओं को रेशम उत्पादन कार्य के लिए प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। रेशम उत्पादन कार्य करके समूह की महिलाएं अपनी आमदनी बढ़ा सकती हैं। समूह की कई महिलाएं रेशम उत्पादन का कार्य कर भी रहीं हैं। - एमजी रवि, जिला प्रबंधक-एनआरएलएम-सोनभद्र।
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