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डेंगू का प्रकोप बढ़ा तो गहराने लगा प्लेटलेट्स का संकट

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जिले में डेंगू के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच प्लेटलेट्स की मांग बढ़ने लगी है। सरकारी ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स की कोई व्यवस्था न होने से मरीजों के परिजन निजी केंद्रों पर मनमाना दाम देने को मजबूर हो रहे हैं। फिर भी समय से प्लेटलेट्स उपलब्ध नहीं हो पा रहा। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि एक माह से ज्यादा का समय हो गया सेप्रेशन मशीन आए लेकिन अब तक मशीन पेटी से बाहर नहीं निकल पाई है।
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डेंगू का सबसे ज्यादा प्रकोप म्योरपुर ब्लाक क्षेत्र में हैं। रेणुकूट नगर व ग्रामीण इलाकों में तेजी से डेंगू मरीजों की संख्या बढ़ी है। डेंगू के प्रकोप में आने वालों में प्लेटलेट्स की कमी स्थिति को गंभीर बना रही है। म्योरपुर सीएचसी और हिंडाल्को अस्पताल में डेंगू मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत उन मरीजों के उपचार में है, जिनमें प्लेटलेट्स काफी कम है।
जिले में राबर्ट्सगंज और दुद्धी में संचालित ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स को ब्लड से अलग करने की कोई सुविधा नहीं है। लिहाजा इन दोनों केंद्रों से मरीजों को मदद नहीं मिल पा रही है। जिन दो निजी केंद्रों पर प्लेटलेट्स की सुविधा है, वहां भी इसकी कमी बनी हुई है। 15 से 20 हजार रुपये खर्च करने के बाद भी उनकी जरूरत नहीं पूरी हो पा रही। लोग सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
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रक्तदान में अग्रणी प्रयास फाउंडेशन के दिलीप दुबे ने बताया कि एक सप्ताह में आठ यूनिट प्लेटलेट्स की व्यवस्था कराई गई है। लगातार इसकी मांग बनी हुई है। कई लोगों से संपर्क करने के बाद एक-दो लोग ही प्लेटलेट्स देने के योग्य मिल रहे हैं। व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से प्लेटलेट्स डोनर की तलाश की जा रही है। जिले में अचानक से डेंगू के केस बढ़ने के कारण यह समस्या आई है।
एक माह से डिब्बे में बंद है सेप्रेशन मशीन
एक यूनिट रक्त को तीन लोगों के लिए उपयोगी बनाने के मकसद से जिला अस्पताल के अधीन संचालित राबर्ट्सगंज ब्लड बैंक को करीब एक माह पहले ही सेप्रेशन मशीन उपलब्ध कराई गई है लेकिन मशीन को अब तक इंस्टाल नहीं किया जा सका है। वर्तमान समय में जब प्लेटलेट्स की किल्लत बनी हुई है तब यह मशीन बेहद उपयोगी होती।
बढ़ रहे मामले, फिर भी पत्राचार तक सिमटी कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो पिछले दस दिनों में डेंगू के मामले जिले में दोगुने हो चुके हैं। इसमें ज्यादातर मामले म्योरपुर ब्लाक और रेणुकूट के आसपास के इलाकों के हैं। मरीज निजी अस्पतालों में ही अपना उपचार करा रहे हैं। तेजी से बढ़ते मामलों के बावजूद बीमारी से निपटने का इंतजाम कागजों तक ही सीमित है। दवाओं के छिड़काव और लार्वा खत्म करने के लिए प्रभावी कदम उठाने के बजाय जिम्मेदार बस पत्राचार कर रहे हैं।
डेंगू मरीजों के आने का क्रम जारी
स्थानीय सीएचसी में डेंगू के मरीजों के आने का क्रम लगातार बना हुआ है। सोमवार को भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कई संदिग्धों के सैंपल लिए गए। उनमें कई दिनों से बुखार, सिर दर्द, कमजोरी महसूस हो रही थी। ऐहतियात बरतते हुए उनका उपचार शुरू कर दिया गया है। अधीक्षक डॉ. शिशिर श्रीवास्तव ने बताया कि सभी संदिग्धों की जांच कराई जा रही है। उनका सैंपल लेकर जिला मुख्यालय भेजा गया है।
अस्पताल के ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स की मशीन मिली है, मगर उसे इंस्टॉल नहीं किया गया है। इसके लिए शासन को पत्र भेजा गया है। प्लेटलेट्स के विकल्प के तौर पर पूरा ब्लड मरीजों को उपलब्ध कराया जाता है। - डॉ. वीके श्रीवास्तव, प्रभारी ब्लड बैंक। जिला अस्पताल।
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