राबट्सगंज क्षेत्र में सूखी धान की खेती।स्रोत जागरूक पाठक
सोनभद्र। मानसून इस बार रूठा हुआ है। अब तक औसत से 30 फीसदी कम बारिश हुई है। इसका असर खेती पर पड़ा है। निजी साधनों के भरोसे धान की रोपाई करने वाले किसान मौसम के हाल को देखकर चिंतित हैं। अवर्षण से फसल के नुकसान होने की दशा में उन्हें बीमा की याद आ रही है, मगर अब तक फसल बीमा के लिए पोर्टल ही नहीं खुला है। अमूमन हर साल फसल बीमा कराने की प्रक्रिया 31 जुलाई तक पूरी हो जाती थी, जबकि इस बार अगस्त के पहले सप्ताह तक इसकी शुरुआत भी नहीं हुई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को चिंतामुक्त करने का माध्यम है। इससे आच्छादित किसानों को प्राकृतिक आपदा के कारण फसल नष्ट होने पर बीमा कंपनी क्षतिपूर्ति देती है। किसानों को लगातार फसल बीमा कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाता रहा है। इसके एवज में किसानों से प्रीमियम की धनराशि भी जमा कराई जाती है। पिछले वर्ष 17 हजार से अधिक किसानों ने फसल बीमा कराया था। इससे पहले यह संख्या 22 हजार के आसपास थी। इन वर्षों में अच्छी बरसात और मौसम अनुकूल रहने से किसानों को इसका कोई खास लाभ नहीं मिला। इस बार शुरुआत से ही मानसून रूठा हुआ है। जून-जुलाई का महीना बीतने के बाद भी औसत से एक तिहाई कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विशेषज्ञ आगे भी अच्छी बारिश न होने की आशंका जता चुके हैं। ऐसे में किसानों को फसल की चिंता सता रही है। जमा-पूंजी लगाकर निजी साधनों से धान की रोपाई करने वाले किसान यह सोचकर चिंतित हैं कि अगर आगे बारिश नहीं हुई तो फसल को कैसे बचाएंगे। जिन किसानों ने बारिश व नहर के सहारे खेती की है, उनकी धड़कन और भी बढ़ी है। ऐसे समय में फसल बीमा किसानों का बड़ा सहारा बन सकता है, मगर इस बार इसकी प्रक्रिया भी सुस्त है। अगस्त का पहला सप्ताह बीतने को है। बावजूद इसके फसल बीमा कराने की शुरुआत भी नहीं हुई है। किसान बैंक, समितियों और कॉमन सर्विस सेंटर पर पहुंचकर बीमा योजना के बारे में पूछताछ कर लौट रहे हैं। बीमा की सामान्य शर्तों के तहत यह जरूरी है कि जिस वस्तु या व्यक्ति का बीमा कराया जा रहा हो, वह मौके पर होना चाहिए। किसानों की चिंता की असली वजह यही है। शुरुआती बारिश या निजी साधनों से किसी प्रकार धान की रोपाई करने वाले किसान अब फसल को बचाए रखने के लिए जूझ रहे हैं। पर्याप्त बारिश न होने से कई इलाकों में फसल सूखने लगी है। बीमा शुरू होने तक वह सुरक्षित रहेगी या नहीं, इसका कोई भरोसा नहीं है। पंजीकरण कराने से पहले ही फसल नष्ट हुई तो फिर बीमा कैसे होगा। ऐसी स्थिति में उन्हें योजना के लाभ से वंचित होना पड़ेगा।