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सर्पदंश से मौत मुआवजे के लिए बिसरा रिपोर्ट जरुरी नहीं

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सोनभद्र। अब सर्पदंश से मृत व्यक्तियों को मुआवजा पाने के लिए बिसरा रिपोर्ट का इंतजार नहीं करना होगा। सरकार ने बिसरा प्रिजर्व करने की व्यवस्था समाप्त कर दी है। अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने डीएम समेत अन्य अधिकारियों को पत्र भेजकर सर्पदंश से हुई मृत्यु में मृतकों के आश्रितों को सप्ताह भर में मुआवजा दिलाने को कहा है। निर्धारित समयसीमा के भीतर आश्रितों को मुआवजा न मिलने पर संबंधित एसडीएम जिम्मेदार होंगे। सरकार ने दो अगस्त 2018 को सर्पदंश को राज्य आपदा घोषित करते हुए सर्पदंश से मृत्यु की दशा में प्रत्येक मृतक के आश्रितों को चार लाख मुआवजा देने का प्रावधान बनाया है। अभी तक मुआवजा देने के प्रावधान जटिल होने से इसे पाने में काफी विलंब हो जाता था। सोनभद्र का अधिकांश क्षेत्रफल पहाड़ों और जंगलों से आच्छादित है। इस नाते यहां सर्वाधिक पीली धारी वाले करैत, इसके बाद ब्लैक कोबरा और रसैल वाइपर पाए जाते हैं। प्रत्येक वर्ष सर्पदंश से 30-35 लोगों की मौत हो जाती है। हालांकि प्रशासन के रिकार्ड में मौतों का आंकड़ा कम है, क्योंकि अधिकांश सर्पदंश के शिकार लोगों की झाडफ़ूंक के चक्कर में मौत होती है और उनका पोस्टमार्टम नहीं होता है। प्रशासन के आंकड़ों पर गौर करें तो एक अप्रैल 2021 से 11 जुलाई तक सर्पदंश से 17 लोगों की मौत हुई है। अपर मुख्य सचिव ने डीएम को पत्र भेजकर अवगत कराया है कि सर्पदंश से मृत्यु को प्रमाणित करने के लिए मृतक की विसरा जांच हेतु फारेंसिक लैब भेजी जाती है और मृतक की विसरा जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा में मृतक के आश्रितों को अहेतुक सहायता समय से उपलब्ध नहीं करायी जाती है। जबकि फारेंसिक स्टेट लीगल सेल के अनुसार सर्पदंश के प्रकरणों में विसरा रिपोर्ट को प्रिजर्व करने का कोई औचित्य नहीं है। सर्पदंश से मृतक के आश्रितों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए मृतक का पंचनामा कराकर पोस्टमार्टम कराया जाय। सर्पदंश से मृत्यु की दशा में मृतक के आश्रितों को अधिकतम 07 दिन के अंदर अहेतुक सहायता उपलब्ध कराई जाय।
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