नगर पंचायत दुद्धी इन दिनों धनाभाव की समस्या से जूझ रही है। आय के नए श्रोत नगर पंचायत में बने भी तो वसूली नहीं हो पा रही है। वहीं शासन ने मिलने वाले धन में भी कटौती कर दी है। इससे नगर पंचायत में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। धन न मिलने से नये काम कराने को कौन कहे कर्मचारियों का वेतन भुगतान करना मुश्किल हो रहा है। कोरोना काल में एक तरफ जहां निजी संस्थान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, वहीं सरकारी संस्थानों के पास धन की कमी हो गई है। धन की कमी के चलते कई कार्य प्रभावित होने लगे हैं। कोरोना काल में शासन से मिलने वाले धन में कमी आई है। नगर पंचायत अध्यक्ष राजकुमार अग्रहरी का कहना है कि नगर पंचायत की आमदनी न के बराबर है। शासन से मिलने वाली धनराशि पर ही विकास का दारोमदार था लेकिन करीब दो वर्ष से लगातार बजट में कटौती के चलते नगर के विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नगर की सबसे बड़ी समस्या पेयजल आपूर्ति से संबंधित है। इस बाबत जिला योजना की बैठक में प्रस्ताव दिया गया था। नगर में पेयजल आपूर्ति की विस्तारीकरण योजना के लिए जिला प्रशासन के निर्देश पर जल निगम के अधिकारियों ने 35 करोड़ रुपए का बजट बनाकर शासन में भेजा है। कई महीने प्रस्ताव भेजे हो गए, लेकिन शासन से अभी तक धन स्वीकृत नहीं हो सका है। इससे नगर पंचायत क्षेत्र में पेयजल योजना का विस्तार नहीं हो पा रहा है। बताया कि शासन से हर महीने 18 लाख का बजट मिलता था, जो इस समय कटौती कर 13 से 14 लाख ही दिया जा रहा है। इसमें से करीब 10 लाख रुपये कर्मचारियों के वेतन एवं पेंशन तथा सफाई के दौरान डीजल पर खर्च हो जा रहा है। शेष धनराशि अन्य कार्य पर खर्च हो जा रहा है। शासन से धन न मिलने से तमाम विकास कार्य भी नहीं हो पा रहे हैं।