स्थानीय स्तर पर मिली भगत कर गायब रहने वाले परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों पर बीएसए नवीन कुमार पाठक का शिकंंजा कसने लगा है। बीएसए ने महीनों से गायब दो शिक्षकों के वेतन भुगतान को रोक दिया है।
जिले के परिषदीय स्कूलों में बड़े पैमाने पर शिक्षकों की नियम विरुद्ध संबंद्धता और बिना स्कूल आए वेतन उठाने का खेल चल रहा है। पिछले साल ही घोरावल ब्लाॅक के दर्जनों स्कूलों में मेडिकल अवकाश के फर्जी रिफ्रेस नंबर को रजिस्टर पर अंकित कर महीनों तक स्कूलों से गायब रहने सहित कई स्कूलों नियमित आने वाले और न आने वाले शिक्षकोंं के रजिस्टर अलग-अलग होने का मामला सामने आया था।
अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद चार शिक्षकों को निलंबित किया गया था, जबकि करीब 18 के वेतन भुगतान को रोक लगा दी गई थी। मगर इस खेल में शामिल विभाग के जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं की गई। शनिवार को बीएसए ने करमा ब्लॉक के न्याय पंचायत पुर खास के कंपोजिट विद्यालय का निरीक्षण किया।
वहां सहायक अध्यापक दिनेश कुमार और अंकुश कुमार महीनों से गायब मिले। ग्रामीणों ने भी उनकी जमकर शिकायत की। हैरानी की बात रही कि बिना स्कूल आए इन शिक्षकों के वेतन का भुगतान हो रहा था। मामला सामने आने के बाद बीएसए ने सख्त रूख अपनाते हुए दोनों शिक्षकों के वेतन भुगतान पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दिया।
उन्होंने कंपोजिट विद्यालय फुलवारी का भी निरीक्षण किया। वहां भी एक शिक्षक महीनों से गायब मिला। हालांकि इस शिक्षक के दूसरे स्कूल जाने की बात सामने आई। इस दौरान जिला स्तरीय टीम ने कुछ रजिस्टर भी कब्जे में लिए हैं।
बीएसए नवीन कुमार पाठक ने बताया कि लंबे समय से कुछ शिक्षकों के संबंध में शिकायत मिल रही थी। इसका संज्ञान लेते हुए पुरखास और फुलवारी के स्कूल का निरीक्षण किया गया। इसमें सहायक अध्यापक दिनेश और अंकुश लंबे समय से अनुपस्थित मिले। इनके वेतन भुगतान पर रोक लगा दी गई है।