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Sonebhadra News: पात्र होकर भी परेशान, नहीं मिल सका आयुष्मान

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जिले में भले ही स्वास्थ्य महकमा आयुष्मान योजना को लेकर अपनी पीठ थपथपाते नहीं थक रहा, मगर जमीनी हकीकत इससे जुदा है। एक ओर जहां जिले में आयुष्मान कार्ड बनाने का क्रम काफी धीमी गति से चल रहा है तो दूसरी ओर आयुष्मान कार्ड धारकों से भी तरह-तरह के शुल्क लेने की बात सामने आती रही है।
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विभागीय आंकड़ों के मुताबिक आदिवासी बहुल जिले में दस लाख 62 हजार 160 लोगों का आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य है। शासन स्तर से रोजाना समीक्षा व निगरानी के बावजूद जिले में आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया काफी धीमी है। अभी तक लक्ष्य के सापेक्ष चार लाख 52 हजार के आस-पास कार्ड बने हैं, जबकि 13 हजार से अधिक मरीजों के इस योजना से आच्छादित होने का दावा भी है। दावों से इतर आयुष्मान कार्ड की एक हकीकत यह भी है कि जिले में एक ओर जहां सर्वे के दौरान नाम में गलती होने के कारण पात्र सूची में होकर भी लोग कार्ड से वंचित हैं तो दूसरी ओर ऐसे हजारों गरीब परिवार हैं जो गरीबी में अपना जीवन बसर करते हुए गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। मगर आर्थिक तंगी उपचार में बाधा बन रही है। सीएमओ कार्यालय में रोजाना बड़ी तादाद में ऐेसे लोग भटकते रहते हैं, जिनके परिजन गंभीर बीमारी की चपेट में है। वह कर्मचारियों के पास आकर सूची में नाम जोड़ने की गुहार लगाते हैं। शासन से इस बारे में कोई प्रावधान न होने का हवाला देकर लौटा दिया जा रहा। लोगों के वंचित होने का प्रमुख कारण पूर्व में विभागीय सर्वे की गड़बड़ी है।
सांस को कैंसर, बहू को ट्यूमर
करमा ब्लॉक के मदैनियां गांव निवासी महेंद्र नाथ मजदूरी करते हैं। उनकी मां कैंसर से ग्रसित हैं। इसी गांव में विमलेश कुमार की पत्नी भी ट्यूमर से ग्रसित हैं। इस परिवार के दोनों लोगों का उपचार वाराणसी से चल रहा है। गंभीर बीमारी होने के बावजूद परिवार में किसी का आयुष्मान कार्ड नहीं है। इसकी प्रमुख वजह आर्थिक रूप से कमजोर होने के बाद भी लाभार्थी सूची में नाम न होना है।
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बाप की कैंसर से मौत, माता भी पीड़ित
चतरा ब्लॉक के कसारी निवासी लाल साहब सोनी पान की दुकान चलाते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता शिवपूजन की छह माह पूर्व कैंसर से उपचार के अभाव में मौत हो गई। उनकी मां भी पेट के कैंसर से ग्रसित हैं। परिवार गरीब है, मगर लाभार्थी सूची में नाम न होने के कारण आयुष्मान कार्ड नहीं है।
विधवा, लाचार कैसे हो उपचार
पन्नूगंज थाना क्षेत्र के पड़री कला निवासी कलावती देवी लघु किसान हैं। बताया कि वे बच्चेदानी में कैंसर से ग्रसित हैं। पति की काफी समय पहले मौत हो गई है। आयुष्मान सूची में नाम नहीं है। ऐसे में उपचार में पैसे की तंगी बाधा बन रही है।
इलाज के अभाव में मौत
पन्नूगंज थाना क्षेत्र के पनिकप कला निवासी विवेक कुमार पान की गुमटी चलाते हैं। उन्होंने बताया कि कुछ माह कैंसर से पीड़ित उनकी माता की उपचार के अभाव में मौत हो गई। परिवार में दो अन्य भाई भी हैं। मगर किसी का भी आयुष्मान सूची में नाम नहीं है।
बेटे के उपचार में बिक गया गहना
पनिकप कला निवासी श्याम नरायण ने बताया कि उनके बेटे को पेट में गंभीर बीमारी के कारण आपरेशन की जरूरत थी। आयुष्मान कार्ड न बन पाने के कारण उन्हें घर में रखे गहनों को बेच कर बेटे का ऑपरेशन कराना पड़ा जिससे उसकी जान बची।
कई लोगों को नहीं है योजना की जानकारी
सोनभद्र। जिले में बड़ी तादाद में ऐसे जरूरतमंद भी है। जो पात्र तो हैं, मगर उन्हें आयुष्मान कार्ड योजना की जानकारी ही नहीं है। प्रचार-प्रसार में कमी इसका एक बड़ा कारण है। ऐसे में लोग जानकारी के अभाव में बेहतर उपचार से वंचित हो जाते हैं या फिर महंगा उपचार मजबूरी बन गया है। लापरवाही का आलम यह है कि सर्वे में शामिल कर्मचारियों ने अपात्र लोगों को शामिल कर लिया और पात्र वंचित रह गए। इसका नतीजा गरीब जनता भुगत रही है। वंचित वर्ग के गरीब रोगी इलाज न करा पाने की वजह से जान देने को मजबूर हैं।
जिले में आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया गतिमान है। जिसका नाम लाभार्थी सूची में नहीं है, या फिर गलत अंकित है। उसके लिए अभी कोई सुधार करने या नाम जोड़ने की सुविधा नहीं है। -डॉ. रोहित कुमार, नोडल आयुष्मान।
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