म्योरपुर ब्लॉक के बभनडीहा गांव में रावण की पूजा करते लोग।
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दशहरा पर एक तरफ जब सभी बुराई के प्रतीक रावण का पुतला जलाकर उत्सव मनाने मेें जुटे थे, वहीं आदिवासी अंचल के कुछ इलाकों में लोग रावण की पूजा में लीन रहे। रावण को अपना पूर्वज मानते हुए आदिवासियों ने विधिपूर्वक पूजा की।
म्योरपुर ब्लाक के रासपहरी और बभनडीहा ग्राम पंचायत में गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन की अगुवाई में बड़ा देव स्थल पर लंकापति रावण की पूजा की गई। गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष जयमंगल सिंह उरेती ने बताया कि आदिवासी जंगलों में रहा करते थे। ऐसे में रावण के कुल के लोग जंगलों में ही रहते थे। इस तरह रावण हमारे पूर्वज हैं।
उन्होंने बताया कि कई प्रदेशों में रावण की पूजा होती रही है। सोनभद्र के दक्षिणांचल के लोग जैसे जैसे यह जान रहे हैं, उस अनुसार रावण की पूजा कर रहे हैं। पूजन में जवाहरलाल मरकाम, राजेश श्याम, समेलाल मरकाम, हरिनाथ, धर्माचार्य मोतीलाल, हरि किशुन, रामधनी कोराम आदि रहे।