सोनभद्र। अति पिछड़े जिले की बालिकाओं के लिए शिक्षा की राह आसान नहीं हो पाई है। प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्तर के बाद बड़ी संख्या में बालिकाओं की पढ़ाई छूट रही है। कोई अत्यधिक दूरी के कारण स्कूल नहीं जा पा रहा तो किसी के पारिवारिक हालात पढ़ाई छोड़ने को विवश कर रहे हैं। हर साल 25-30 प्रतिशत बालिकाएं ड्राप आउट हो रही हैं। वहीं दाखिला लेने वाली बालिकाओं की स्कूल में उपस्थिति भी कम है।
बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2020-21 में कक्षा-4 में पंजीकृत छात्राओं की संख्या 25913 थी। इसमें से 24522 छात्राएं ही वर्ष 2022-23 में पांचवीं कक्षा में पहुंच सकीं। पांचवीं कक्षा की बात करें तो वर्ष 2021-22 में 23848 छात्राओं में से 20430 का ही दाखिला छठवीं कक्षा में हो सका था।
इस तरह 3418 छात्राओं ने पांचवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। नौंवी में यह आंकड़ा 30 प्रतिशत से भी अधिक है। वर्ष 2021-22 में 21902 बालिकाओं का पंजीकरण आठवीं कक्षा में हुआ था, जबकि अगले साल यानि 2022-23 में सिर्फ 15182 छात्राएं ही कक्षा-नौ में पहुंच सकीं। कुल 6720 छात्राओं ने आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी।
दसवीं और फिर 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ने वाली बेटियों की संख्या इससे भी कहीं अधिक है। बालिकाओं के ड्राप आउट का यह आंकड़ा तब है, जब बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर सरकार का विशेष जोर है। बालिकाओं की बेहतर शिक्षा के लिए सरकार तमाम योजनाओं के साथ कई सुविधाएं भी दे रही हैं। बावजूद बालिकाओं को अच्छी शिक्षा से जोड़ना चुनौती बनी हुई है।
इसलिए छूट रही पढ़ाई
बालिकाओं के ड्राप आउट होने की मुख्य वजह संसाधनों के अभाव को माना जा रहा है। भौगोलिक रूप से जिले की संरचना काफी जटिल है। चोपन, म्योरपुर, बभनी, कोन, नगवां ब्लॉक के कई इलाकों तक पहुंचना आसान नहीं है। कहीं सड़क नहीं तो कहीं आवागमन के साधन नदारद हैं। इन क्षेत्रों में आठवीं तक के स्कूल पास में होने से बालिकाएं पढ़ाई कर लेती हैं, लेकिन इसके आगे की पढ़ाई के लिए अभिभावक बेटियों को घर से दूर भेजने के लिए तैयार नहीं हाेते। दसवीं के बाद तो पढ़ाई और मुश्किल हो जाती है। आदिवासी बहुल दुद्धी तहसील क्षेत्र में सिर्फ एक राजकीय महाविद्यालय दुद्धी में है।
विशेष अभियान चलाकर ड्राप आउट बालिकाओं का आगे की कक्षा में दाखिला कराया जा रहा है। शारदा पोर्टल के माध्यम से इसकी निगरानी की जाती है। जो बालिकाएं दूरदराज के इलाकों की हैं, उनके लिए हर ब्लॉक में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय स्थापित है। अभिभावकों को भी बेटियों की शिक्षा के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। -नवीन कुमार पाठक, बीएसए।