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सरकारी अस्पतालों में कम हैं दवाएं, बाहर से लिखी जा रही

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सोनभद्र। जिले के सरकारी अस्पतालों में दवाएं कम हैं। इससे मरीजों को दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। हाल यह है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं। जिला अस्पताल में वर्तमान में 248 दवाओं की लिस्ट में से महज करीब 110 दवाएं ही उपलब्ध हैं। लेकिन विभागीय अधिकारी, कर्मचारी यह जानकारी नहीं दे रहे कि कौन-कौन की दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। काफी दिनों तक एंटी रैबिज इंजेक्शन व एंटी वेनम इंजेक्शन उपलबध नहीं था लेकिन अब करीब पिछले पांच दिनों से यह इंजेक्शन उपलब्ध हुआ है। घोरावल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटी रेबीज इंजेक्शन व एंटी वेनम इंजेक्शन उपलब्ध है। पांच दिन पहले यहां एंटी रेबीज इंजेक्शन आया है। इस समय कुत्ते के काटने से पीड़ित लोगों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया जा रहा है। इसके पूर्व करीब एक सप्ताह तक एंटी रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध न होने से कुत्ते के काटने से पीड़ित दर्जनों लोग वापस लौट गए थे। सीएचसी अधीक्षक डॉ.मुन्ना प्रसाद ने बताया कि अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध है और मरीजों को इंजेक्शन लगाया जा रहा है। दुद्धी: स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर इस समय कुत्ता काटने की इंजेक्शन एंटी रेबीज इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। शुक्रवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रिंस पुत्र रविंद्र निवासी रेणुकूट, शर्मा चेरों पुत्र मनोगी सहित छह लोगों को फार्मासिस्ट सीपी सोनी ने इंजेक्शन लगाया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के शिक्षा अधिकारी डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि अस्पताल में मरीजों के लिए मेडिसिन भी उपलब्ध है। वैनी: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एंटी रैबिज इंजेक्शन और स्नेक वेनम उपलब्ध है और 70 जेनेरिक दवाये उपलब्ध हैं।सामान्य रोगों के जो भी मरीज आते हैं उनको दवा उपलब्ध करा दी जाती है। गंभीर रोगों के मरीजों की दवा उपलब्ध नहीं हो पाती। चिकित्सा प्रभारी आरके बिंद ने बताया कि शुक्रवार को एंटी रैबिज का चार डोज चार लोगों को लगाया गया है। संजय निवासी हरदी ने बताया कि उसके नाती की तबीयत खराब थी। वे उसे लेकर दवा कराने गये थे। हॉस्पिटल से कुछ दवाएं दी गई लेकिन एक सिरप बाहर से लिखा गया, जो हॉस्पिटल में नहीं थी। डॉक्टर ने कहा कि दो दिन बाद आ जाएगी। ललिता निवासी आमडीह ने बताया कि वह जो दवा लेने आई थी, वह उसे मिल गई। कभी-कभी दवा नहीं रहने के वजह से रोगों की दवाएं नहीं मिल पाती हैं जो बाहर से लेना पड़ता है।
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