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अक्षय नवमी को किया जाने वाला पुण्य नहीं होता क्षय

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सोनभद्र। देवोत्थान एकादशी से दो दिन पहले मनाई जाने वाली अक्षय नवमी का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया जाने वाला दान-पुण्य कभी क्षय नहीं होता है। अक्षय नवमी को आंवला के पेड़ के नीचे भोजन पकाकर परिवार के साथ खाना चाहिए। कोहड़े के साथ रत्न दान करने का भी विधान है।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. सुरेंद्र नाथ तिवारी के मुताबिक कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी के रूप में मनाया जाता है। सनातन धर्म में अक्षय नवमी के दिन दानपुण्य एवं अनुष्ठान करने का विशेष फल बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन जो व्यक्ति दान पुण्य करता है वह क्षय नहीं होता है। वैसे तो कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष में किसी भी दिन आंवले के पेड़ के नीचे भोजन किया जा सकता है। मगर, अक्षय नवमी के दिन आंवले के पेड़ के नीचे भोजन पकाकर ब्राह्मण को खिलाने के बाद परिवार के साथ खुद भोजन करना विशेष फलदायी माना गया है। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन कुष्मांडा के गर्भ में रखकर (कोहड़े के साथ) सोना-चांदी का गुप्तदान किया जाता है। इस दिन ऐसा गुप्त दान करना चाहिए जो दान लेने वाले को दान किया रत्न न दिखाई दें।
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