सोनभद्र। नगर की सुंदरता पर जिम्मेदारों की उदासीनता भारी पड़ रही है। राबर्ट्सगंज के जिन चौराहों का नगर पालिका व अन्य विभागों ने कायाकल्प कराया था, उनमें से किसी की सुंदरता कायम नहीं रह सकी है। बिना अनुमति चारों तरफ लगे बैनर-होर्डिंग और पोस्टर की आड़ में चौराहों की सुंदरता छिप गई है।
किसी भी नगर का आकर्षण और वहां के विकास को चौराहों की सुंदरता से आंका जाता है। इसे ध्यान में रखकर पिछले साल लाखों रुपये खर्च कर बढ़ौली चौक व धर्मशाला चौक का कायाकल्प कराया गया था। चौराहों पर फव्वारों की स्थापना, लाइटिंग के साथ ही फ्लाईओवर पर तरह-तरह की पेंटिंग हुई। भगत सिंह, महात्मा गांधी, भगवान शंकर, गणेश, मां दुर्गा की तस्वीरें भी दीवारों पर पेंट से उकेरी गईं। बढ़ौली चौक पर इंटर लाकिंग बिछाई गई। वहीं बैठने के लिए सीमेंटेड कुर्सियों का निर्माण कराया गया, पौधे भी लगाए गए। कुछ महीनों के बाद ही यह चौराहे जिम्मेदारों की उदासीनता के शिकार हो गए हैं। लाखों खर्च कर जिम्मेदारों ने सुंदरीकरण करा कर अपनी पीठ खूब थपथपाई, मगर उसे सहेजने में जिम्मेदार नाकाम साबित हो रहे हैं।
महापुरुषों की तस्वीरों पर लगा दिए गए हैं पोस्टर
बढ़ौली चौक व धर्मशाला चौक पर सुंदरीकरण के दौरान दीवारों पर महात्मा गांधी, भगत सिंह, मां दुर्गा, भगवान गणेश, भगवान शंकर सहित अन्य की तस्वीर बनाई गई थी। इसके साथ ही सुंदर लेख भी मौजूद हैं। मगर इन्हें प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से बर्बाद किया जा रहा है। शहर के कतिपय व्यापारी, शैक्षणिक संस्थाओं और राजनीतिक दल अपने प्रचार-प्रसार करने के लिए सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं। यहां महापुरुषों के चित्र पर भी पोस्टर लगा दिया गया है, जिससे सारे सुंदरीकरण के कार्य इन पोस्टरों से पट गए हैं।
कूड़े का ढेर व्यवस्था को चिढ़ा रहा मुंह
बढ़ौली चौक व धर्मशाला चौक पर जहां सुंदरीकरण का कार्य कराया गया था, वहां कई स्थानों पर कूड़े का ढेर लगा है। सफाई कर्मी इस पर ध्यान नहीं दे रहे। भले ही नगर को पॉलिथीन मुक्त बनाने का अभियान चल रहा हो, मगर यहां प्लास्टिक में ही कूड़ा रखा है। कुछ जगह पर पानी जमने से काई लगी है। जहां लोगों का पैर फिसलने का खतरा भी बना हुआ है। साफ-सफाई के साथ ही बेहतर प्रबंध ना होने से यहां कुत्तों के झुंड का बसेरा रहता है, जो स्कूली बच्चों के साथ ही राहगीरों के लिए कभी भी खतरा बन सकता है।
कोतवाली के पास भी पोस्टरों की भरमार
जब जिम्मेदार ही बेपरवाह हो तो किसी भी व्यवस्था को सुधारना काफी मुश्किल होता है। शासन का नियम है कि सरकारी संपत्ति पर बिना किसी अनुमति के पोस्टर नहीं लगा सकते हैं। फिर भी सदर कोतवाली के सामने ही फ्लाईओवर को अवैध पोस्टरों से ढंक दिया गया है। इस पर कार्रवाई करने के लिए कोई आगे नहीं आता है। यहां से बढ़ौली चौक की दूरी महज 50 मीटर है। पुलिस के अधिकारियों के साथ ही यहां जिला प्रशासन के अफसर भी आते हैं। मगर कोई भी इन पर ध्यान नहीं देता।
नगर भर में पोस्टरों की भरमार
प्रमुख चौराहों के साथ ही नगर की सरकारी इमारतें, कचहरी, कलेक्ट्रेट प्रवेश द्वार सहित अन्य स्थान विद्युत पोल भी बिना अनुमति के निजी संस्थाओं और नेताओं के लिए प्रचार का साधन बने हुए हैं। शहर के अधिकांश बिजली पोल और पेड़ों पर बिना अनुमति के विज्ञापन के कट आउट, बैनर और बोर्ड आदि देखे जा सकते हैं। इसी तरह सार्वजनिक स्थलों पर भी बिना अनुमति के विज्ञापन पोस्टर आदि लगे हुए हैं। सरकारी पोल पर प्रचार बोर्ड लगाना अवैध है, लेकिन शहर में खुलेआम प्रशासन के सामने नियमों की अवहेलना की जा रही है। नगर पालिका द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे राजस्व की हानि हो रही है। वहीं बिजली पोल पर प्रचार बोर्ड लगने से बिजली कर्मचारियों को यहां फाल्ट होने पर उसे सुधारने के लिए परेशान होना पड़ता है।
मामला नगर पालिका से संबंधित है। उनकी ओर से इसके लिए जो भी प्रयास किया जाएगा, पुलिस विभाग से उसमें सहयोग किया जाएगा। अगर कहीं भी महापुरुषों की तस्वीर को ढंका जा रहा है तो यह गलत है। नियमानुसार कार्रवाई होगी। - राहुल पांडेय, सीओ सिटी।
चौराहों का सुंदरीकरण कराया गया है। पूर्व में लगे पोस्टरों को हटवाते हुए हिदायत भी दी गई थी। इसके बाद भी जिन लोगों ने पोस्टर बिना अनुमति से लगाया है, उन्हें नोटिस दिया जाएगा। पोस्टरों को भी हटावाया जाएगा। - विजय बहादुर यादव, ईओ।