यूजीसी की नई नीतियों और प्रस्तावित कानून के विरोध में सवर्ण आर्मी के बैनर तले मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और यूजीसी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इसे छात्र हितों के विपरीत बताया और तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यूजीसी का नया कानून शिक्षा के क्षेत्र में असमानता बढ़ाएगा और विभिन्न वर्गों के बीच टकराव की स्थिति पैदा करेगा। चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। जिलाध्यक्ष अशोक दुबे ने कहा कि यूजीसी को लेकर पूरे देश में विरोध हो रहा है। यह कानून गलत तरीके से लागू किया गया है, जिसमें एक वर्ग विशेष को संरक्षण दिया गया है। इससे सामान्य, ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के छात्रों के बीच संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून जातिवाद को बढ़ावा देने वाला है। अशोक दुबे ने कहा कि बिना समुचित जांच के सामान्य वर्ग के छात्रों पर कार्रवाई की व्यवस्था की गई है, जबकि अन्य वर्गों के मामलों में समान प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती। इससे छात्रों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि 22 फरवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। जिला महिला सचिव आरती पांडेय ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह का विभाजन समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। यूजीसी एक्ट में सवर्ण समाज के साथ भेदभाव की प्रक्रिया अपनाई गई है। इससे समाज में आपसी तनाव बढ़ रहा है। उन्होंने मांग की कि जातिगत आरक्षण समाप्त कर सभी को समान अवसर दिया जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्र हितों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर सरकार ने यूजीसी बिल को वापस नहीं लिया तो आंदोलन को प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक रूप दिया जाएगा। प्रदर्शन में जिला संयोजक कमलाकांत तिवारी, संरक्षक शिवपूजन त्रिपाठी, अविनाश शुक्ला, कपिल कांत पाठक, शिवदत्त तिवारी, अभय पांडेय, बृज किशोर पांडेय, बमबम दुबे, हेमंत तिवारी, कृष्ण कुमार मिश्र शामिल रहे।