राबर्ट्सगंज में ठंड से बचने के लिए अलाव तापते लोग।
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सोनभद्र। सर्द हवा चलने से ठिठुरन बढ़ी है। न्यूनतम पारा पांच डिग्री सेल्सियस के नीचे पहुंच जा रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार रैन बसेरा में व्यवस्था को लेकर बेखबर हैं। इस नाते रैन बसेरा का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। जानकारी न होने से काफी तादाद में लोग मंदिरों के साथ सड़क के फुटपाथ, फ्लाईओवर के नीचे रात गुजारने को विवश हैं। बाहर से आने वाले मुसाफिरों के ठहरने के लिए नगर के मध्य में स्थाई रैन बसेरा बना हुआ है। पचास बेड के इस रैन बसेरा में मौजूदा समय में न तो कंबल पर्याप्त है और न ही लोगों को यहां तक पहुंचने के लिए चट्टी चौराहों पर होर्डिंग व बैनर पोस्टर लगाए गए हैं। जानकारी के अभाव में इतनी सर्द पड़ने के बाद भी लोग फ्लाईओवर के नीचे या फिर मंदिरों में रात गुजारने को विवश हैं। बुधवार की रात में रैन बसेरा में महज पांच लोग ठहरे हुए थे। दूसरी तरफ बढ़ौली चौक, धर्मशाला चौक और चंडी तिराहा के पास फ्लाईओवर के नीचे 10 से 12 की संख्या में लोग जहां-तहां सोए हुए मिले। ठंड से ठिठुरते लोगों की रात एक चादर के भरोसे कट रही थी। पूछने पर उनका कहना था कि रैन बसेरा के बारें में उन्हें जानकारी नहीं है। इस नाते यहां वे रात गुजार रहे हैं। इसमें कई मुसाफिर गैर जनपद के तो कई जिले के सुदूर इलाके के बताए गए। वहीं दो-तीन की संख्या में लोग रैन बसेरा से चंद दूरी पर स्थित रामजानकी मंदिर में सोये मिले। कड़ाके की ठंड पड़ने के बाद भी नगर में संचालित रैन बसेरा के स्थिति में कोई बदलाव नहीं होने से लोगों में नाराजगी है।