सोनभद्र के खेत में तैयार ड्रेगन फ्रूट के पौधे
सोनभद्र। धान, गेहूं और मोटे अनाज की खेती के लिए पहचाने जाने वाले सोनभद्र में अब खेती की तस्वीर तेजी से बदल रही है। जिले के किसान पारंपरिक फसलों के साथ ड्रैगन फ्रूट और स्ट्रॉबेरी जैसी नकदी फसलों की खेती कर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। अनुदान योजनाओं और उद्यान विभाग के तकनीकी सहयोग ने इस बदलाव को गति दी है। जिले में इस समय 182 किसान ड्रैगन फ्रूट और स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। इनमें 106 किसान करीब 150 एकड़ में ड्रैगन फ्रूट और 76 किसान लगभग 75 एकड़ में स्ट्रॉबेरी का उत्पादन कर रहे हैं। उद्यान विभाग ने वर्ष 2026-27 में ड्रैगन फ्रूट का रकबा 200 एकड़ और स्ट्रॉबेरी का 100 एकड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम के अनुसार एकीकृत बागवानी मिशन के तहत ड्रैगन फ्रूट की खेती पर 2.70 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर और स्ट्रॉबेरी की खेती पर 90 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान दिया जा रहा है। इससे किसानों की शुरुआती लागत कम हो रही है और वे नई तकनीक के साथ खेती करने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। ड्रैगन फ्रूट की खासियत यह है कि इसमें पानी की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है और एक बार पौधे लगाने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन मिलता रहता है। वहीं स्ट्रॉबेरी की बाजार में लगातार बढ़ती मांग किसानों को बेहतर दाम दिला रही है। विभाग के अनुसार ड्रैगन फ्रूट से प्रति एकड़ 5 से 6 लाख रुपये और स्ट्रॉबेरी से 10 से 12 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ संभव है।