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Sonebhadra News: डीएम ने दिखाई सख्ती, बिठाया पुलिस का पहरा, तब 44वें दिन वरिष्ठ सहायक ने सौंपा चार्ज

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भुगतान न होने के चलते मेडिकल कॉलेज परिसर से कूड़ा उठान बंद होने पर लगा ढेर। - संवाद - फोटो : 1
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सोनभद्र। तबादले के बाद भी चार्ज देने में आनाकानी कर रहे मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ सहायक धीरज श्रीवास्तव ने मंगलवार को 44वें दिन अपना चार्ज सौंप दिया। डीएम की सख्ती और पुलिस का पहरा बिठाने के बाद वरिष्ठ सहायक ने मेडिकल कॉलेज पहुंचकर चार्ज सौंपा। इसके बाद प्राचार्य प्रो. आनंद कुमार ने कार्यमुक्ति का पत्र थमाते हुए रिपोर्ट डीएम को भेज दी। वरिष्ठ सहायक धीरज श्रीवास्तव का तबादला गत 30 मई को सीएमओ कार्यालय बलरामपुर के लिए हो गया था। तबादले के बाद चार्ज नहीं सौंपा गया। कॉलेज प्रबंधन जब भी संपर्क करता तो कोई न कोई दलील देकर टाल दिया जा रहा था। इसके चलते आयुष्मान मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं के ठप पड़ने व अन्य सेवाओं पर भी असर पड़ने लगा था। प्राचार्य ने सोमवार को महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण (डीजीएमई), प्रमुख सचिव और जिलाधिकारी को पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया था। साथ ही संबंधित कर्मचारी को अंतिम चेतावनी भी जारी की थी। आरोप था कि स्थानांतरण के बावजूद उसने अब तक लेखा शाखा का चार्ज, भुगतान संबंधी फाइलें, अभिलेख और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज नहीं सौंपे। इससे आयुष्मान भारत योजना के साथ-साथ नियमित प्रशासनिक और वित्तीय कार्य प्रभावित होने के साथ वेंडरों के भुगतान, आवश्यक सामग्री की खरीद और कर्मचारियों के देयकों के निस्तारण में दिक्कतें आ रही हैं। मंगलवार को नगर पालिका कर्मियों ने भी नौ महीने से निस्तारण शुल्क न मिलने के कारण कॉलेज से निकलने वाला कूड़ा उठाने से मना कर दिया। वहीं सफाईकर्मियों ने भी मानदेय लंबित होने पर कार्य में आनाकानी शुरू कर दी। स्थिति गंभीर देख डीएम चर्चित गौड़ ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने वरिष्ठ सहायक को कलेक्ट्रेट बुलवाकर खासी फटकार लगाई। चार्ज सौंपे जाने तक के लिए लोढ़ी चौकी इंचार्ज उमाशंकर यादव की अगुवाई में पुलिस का पहरा भी बिठा दिया। हिदायत दी कि अगर अभी भी वह चार्ज सौंपने में आना-कानी करता है तो प्राथमिकी दर्ज करते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। लगभग चार घंटे तक चली मशक्कत के बाद मेडिकल कॉलेज के शिक्षण फैकल्टी में चार्ज सौंपने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। मामले में तत्कालीन प्राचार्य की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार वर्ष 2022 में निदेशक प्रशासन ने संबंधित कर्मचारी को वित्तीय और संवेदनशील पटल का कार्य नहीं सौंपने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2023 से उन्हें लेखा और भुगतान संबंधी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दे दी गईं। इससे लंबे समय से भुगतान तो अटकाए ही गए, 43 दिन तक चार्ज रोके जाने से भी प्रबंधन को खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
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