रॉबर्ट्सगंज नगर के अकड़हवा पोखरा स्थित रामजानकी मंदिर परिसर में चल रहे महायज्ञ में कथावाचक नीरजानंद ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग का वर्णन किया। कथा श्रवण करने बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। बताया कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए महर्षि नारद के निर्देश पर कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया, जिसके बाद शिव-पार्वती का विवाह संपन्न हुआ। भगवान शिव की बारात और इस विवाह के वर्णन को सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। कथा में बताया गया कि एक बार भगवान शिव अगस्त्य ऋषि के आश्रम से कथा श्रवण कर लौट रहे थे, तभी उन्हें भगवान राम के दर्शन हुए। शिवजी ने दूर से ही प्रभु राम को प्रणाम किया और माता सती से भी प्रणाम करने को कहा। सती ने तर्क करते हुए परीक्षा लेने की जिद के कारण सीता का रूप धारण करने की घटना और उसके परिणामस्वरूप हुए प्रसंग को भी कथाव्यास ने प्रस्तुत किया और सती का पार्वती रूप में पुनर्जन्म लेकर भगवान शिव का वरण करने का प्रसंग सुनाया। इस मौके पर नीरज मिश्र, मनोरथ प्रसाद, विनय कुमार, राजू पांडेय, अरुण पांडेय आदि शामिल रहे।