सोनभद्र। उपकृषि निदेशक डीके गुप्ता ने बताया कि फसल अवशेष (पराली) जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए पूर्व से ही राजस्व विभाग, पुलिस विभाग एवं कृषि विभाग के अधिकारियों की टीम गठित की गई है। जिनके माध्यम से फसल अपशिष्ट जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। विगत साल से ही फसल अवशेष जलाना प्रतिबंधित किया गया है। उन्होंने कहा कि किसान फसल अवशेष अपने खेतों में कदापि न जलाये। यदि जलाते हुए पाये जायेगें तो उनसे राष्ट्रीय हरित ट्रिब्युनल के माध्यम से निर्धारित, अर्थ दण्ड की धनराशि वसूली जायेगी। कृषि भूमि का क्षेत्रफल दो एकड़ से कम होने की दशा में अर्थदंड 2500 प्रति घटना, कृषि भूमि का क्षेत्रफल दो एकड़ से अधिक पांच एकड़ से कम होने की दशा में 5000 प्रति घटना। कृषि भूमि का क्षेत्रफल पांच एकड़ से अधिक होने की दशा में 15000 रुपये प्रति घटना अर्थ दण्ड का प्रावधान है। साथ ही बिना स्ट्रारीपर/सुपर मैनेजमेंट सिस्टम के धान की कटाई करने वाले हार्वेस्टिंग मशीन (कम्बाइन) संचालकों के पकड़े जाने पर कम्बाइन को सीज कर दिया जायेगा एवं अर्थ दण्ड के साथ ही एफआईआर भी दर्ज की जायेगी।