सोनभद्र। सोन नदी में बालू खनन पर रोक लगाने से जुड़े एनजीटी के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया है। मामले की सुनवाई अब ग्रीष्मावकाश के बाद होगी। अगली तिथि तक कोर्ट ने स्टे को प्रभावी किया है। इस फैसले के बाद पट्टाधारकों ने राहत महसूस की है। उधर, एनजीटी में याचिक दायर करने वाले पक्ष ने अगली तिथि पर कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखने की बात कही है।
कछुआ, घड़ियाल और मगरमच्छ जैसे जलीय जीवों की सुरक्षा का हवाला देकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए गत 19 मई को एनजीटी ने सोन नदी में खनन कार्य पर रोक लगा दी है। आदेश के अनुपालन में जिला प्रशासन ने सोन नदी के सभी खनन पट्टों को बंद करा दिया था। एनजीटी के आदेश को चुनौती देते हुए चंद्रशेखर चौरसिया सहित अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। उनकी अपील याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे, मयंक पांडेय, आशीष कुमार पांडेय ने बहस की। उधर, विरसा मुंडा फाउंडेशन के ओर से अधिवक्ता अभिषेक चौबे, मनीष तिवारी, आरके तंवर और निहार रंजन सिंह ने बहस में अपना पक्ष रखा। बहस सुनने के बाद कोर्ट ने गर्मी के अवकाश के बाद अगली सुनवाई तक स्टे दिया है। इस बाबत विरसा मुंड फाउंडेशन के विकास शाक्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखा जाएगा। जिला प्रशासन से उम्मीद जताया कि सुप्रीम कोर्ट के अग्रिम आदेश तक खनन होता है तो वह सेंचुरी और सोन नदी की धारा को किसी भी प्रकार से अवरुद्ध व प्रभावित न करें।