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सावन में ऐसा सूखा, पहले नहीं देखा

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बीजपुर क्षेत्र में धान की नर्सरी में पानी के अभाव में फटी दरारें। - फोटो : SONBHADRA
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अषाढ़ के बाद सावन में भी अब तक बारिश न होने से क्षेत्र के किसान चिंतित हैं। बुजुर्ग किसानों का मानना है कि सावन में ऐसा मौसम पहली बार देखा जा रहा है। एक सप्ताह के भीतर अच्छी बरसात नहीं हुई तो धान की नर्सरी सूख जाएगी। इसके बाद सूखे के संकट से जूझना पड़ेगा।
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रोरवा के किसान मुनेश्वर राम ने बताया कि वर्ष 1967 का अकाल भी हमने देखा है लेकिन उससे भी दयनीय स्थिति की इस बार आशंका है। उस वक्त मक्का की खेती हो गई थी, जबकि अबकी बारिश के अभाव में कोई फसल नहीं हो पाएगी। जो भी घर में था उसे भी धान की नर्सरी व खेतों की जोताई में लगा दिया। अब घर में खाने के लिए कुछ बचा नहीं है। सुमेर राम का कहना है कि इतनी लंबी उम्र में सावन मास में इस प्रकार का सूखा नहीं देखा था। प्रतिदिन खेतों में जाकर बरसात होने की आस में धान की नर्सरी बचा रहे हैं लेकिन अब उसमें पीलापन आने लगा है। सुनेश्वर राम ने 1967 के अकाल का वृत्तांत बताते हुए कहा कि उस समय सस्ती का जमाना था। अब तो भरपेट खाना भी मिलना मुश्किल होगा। बृजराम ने बताया कि क्षेत्र में सिंचाई का कोई साधन नहीं है। भगवान भरोसे ही खेती पर हम सभी निर्भर हैं। अधिकतम सप्ताह भर का समय है। बरसात नहीं हुई तो जनजीवन अस्त व्यस्त हो जाएगा।
खेतों में आई दरार, सूख गई नर्सरी
दक्षिणांचल के खेत पूरी तरह बारिश पर निर्भर है। डोडहर, जरहा, चेतवा, नेमना, इंजानी, महुली, रजमिलान, पिंडारी, लीलाडेवा, सिंदूर, खम्हरिया, झीलों आदि गांवों में बारिश न होने से हाहाकार मचा है। धान, अरहर, तिल, बाजरा, मक्का, मूंगफली, मूंग सहित दलहन तिलहन की फसल खेतों में सूख जाने से अन्नदाता भरण पोषण को लेकर चिंतित हो गए हैं। किसान राजेंद्र सिंह बघेल, रामजन्म पाल, त्रिभुवन नारायण सिंह, राजकुमार सिंह, श्यामसुंदर जायसवाल, राहुल सिंह, अभिषेक सिंह, रामजी आदि किसानों के चेहरे पर मायूसी है। कहा कि खेतों में फसल को कौन कहे दूर दूर तक हरियाली और घास नहीं है। सूखे की मार से लोगों को परिवार सहित पशुओं के पालन पोषण की चिंता सता रही है। किसानों ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है।
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