घोरावल ब्लॉक के डोमखरी गांव में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बुद्धिसागर की मूर्ति का अनावरण।
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अंग्रेजों के हौसले पस्त करने वाले प्रखर सेनानी बुद्धिसागर शुक्ल की प्रतिमा का बृहस्पतिवार को डोमखरी गांव में अनावरण हुआ। स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
मुख्य अतिथि स्वतंत्रता सेनानी पं. महादेव प्रसाद चौबे व प्रभा शंकर चौबे के पौत्र विजय शंकर चतुर्वेदी ने कहा कि जब बुद्धिसागर शुक्ल सत्याग्रह कर रहे थे तो गांव स्थित बरगद के पेड़ में बांधकर उन्हें मारा पीटा जाता था। अंग्रेज सिपाहियों का लोगों को डर इतना होता था कि बुद्धिसागर शुक्ला कई घंटों से बंधे रहते थे लेकिन कोई भी अंग्रेजों की प्रताड़ना के डर से उन्हें पेड़ से नहीं खोलता था। इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी ने कहा कि बुद्धिसागर शुक्ल का जन्म 30 अगस्त 1930 को ग्राम डोमखरी में हुआ था। महात्मा गांधी के आह्वान पर उन्होंने 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन में भाग लिया। 16 अप्रैल 1941 को उन्हें गिरफ्तार कर 3 महीने और 50 रुपये जुर्माने की सजा दी गई। पराधीनता से स्वाधीनता तक का दौर देखा। शशिभूषण पांडेय ने बताया कि बुद्धिसागर शुक्ल शहीद उद्यान से परिवर्तन अखबार लेकर घोरावल क्षेत्र में वितरित करते थे। नवयुवक मंगल दल के जिलाध्यक्ष सौरभकांत पति तिवारी ने कहा कि आने वाली पीढ़ियां बुद्धिसागर शुक्ल जी से प्रेरणा लेंगी। भोलानाथ मिश्र ने आजादी के अमृत महोत्सव पर प्रकाश डाला। बुद्धि सागर शुक्ला के पौत्र अजीत शुक्ला और अरविंद शुक्ला ने अतिथियों को सम्मानित किया। अध्यक्षता ग्राम प्रधान भान सिंह ने की। इस मौके पर अमृतसर दुबे, परमेश्वर शुक्ला, प्रभा शंकर शुक्ला, दशरथ शुक्ला, प्रमोद शुक्ला, सरोज सिंह, रुद्र प्रताप सिंह, मनोज कुमार सिंह, सुनील चौबे, प्रेम शंकर पांडेय, उदय बहादुर सिंह आदि मौजूद रहे।