मधुपुर (सोनभद्र) । गांव की पगडंडियों पर दाैड़ लगाने वाले रामबाबू अब 24 अगस्त से बुडापेस्ट में होने वाली विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में प्रतिभाग करेंगे। वह 35 किमी पैदल चाल प्रतियोगिता में दुनिया के खिलाड़ियों को चुनौती पेश करेंगे। रामबाबू के इस प्रदर्शन पर पूरे देश की निगाह होगी। इस प्रतियोगिता के लिए वह तैयारियों में जुटे हैं।
बहुअरा गांव के भैरवागांधी टोले में एक छोटे से खपरैल के मकान में रहने वाले रामबाबू पिछले साल अचानक से तब चर्चा में आए, जब उन्होंने गुजरात में हुए राष्ट्रीय खेलों की पैदल चाल स्पर्धा में नए राष्ट्रीय रिकार्ड के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया था। उन्होंने 35 किमी की दूरी महज 2 घंटे 36 मिनट और 34 सेकेंड में पूरी की थी। इससे पहले यह रिकार्ड हरियाणा के मुहम्मद जुनैद के नाम था। राष्ट्रीय खेल में जुनैद को हराकर ही रामबाबू ने स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद 15 फरवरी को रांची में आयोजित राष्ट्रीय पैदल चाल चैंपियनशिप में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ते हुए 2 घंटे 31 मिनट 36 सेकेंड का समय निकाला। 25 मार्च को स्लोवाकिया में अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाग करते हुए 2 घंटे 29 मिनट 56 सेकेंड में दूरी तय की। अब वह 24 अगस्त को हंगरी के बुडापेस्ट में भारत की तरफ से 35 किमी पैदल चाल में प्रतिभाग करेंगे। रामबाबू ने मधुपुर में पढ़ाई के दौरान ही एथलीट बनने का सपना देखा था। इसे पूरा करने के लिए उन्होंने गांव के कच्चे चकरोड पर अभ्यास शुरू कर किया। पिता छोटेलाल कृषि मजदूर के रूप में काम करते हुए बेटे को हरसंभव प्रोत्साहित करते रहे। कठिन परिश्रम से गांव के पगडंडी से निकल कर रामबाबू राष्ट्रीय फलक पर छाने में कामयाबी पाई।