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बियाही बेटियां जाएंगी कैसे, किसानों पर अभी कर्जे बहुत हैं

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सोनभद्र। मित्र मंच फाउंडेशन की ओर से प्रसिद्ध शायर मिर्जा गालिब की जयंती शुक्रवार की रात राबर्ट्सगंज के एक होटल परिसर में मनाई गई। इसमें मुशायरा व कवि सम्मेलन हुआ। इसमें खुमार देहलवी ने अपने शेर के जरिए किसानों के दर्द को बयां किया। उनका शेर बियाही बेटियां जाएंगी कैसे, किसानों पर अभी कर्जे बहुत हैं, लोगों ने खूब सराहा।कार्यक्रम की शुरूआत मुख्य अतिथि सदर विधायक भूपेश चौबे, एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह, विजय जैन, अध्यक्ष विकास वर्मा व अन्य ने गालिब के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्जवलित कर किया। फिर जगदीश पंथी ने सरस्वती वंदना एवं कासिम नदीमी ने नात-ए-पाक पेश किया। जमील खैराबादी का शेर मैं क्या बताऊं, क्या सरे बाजार हो गया, इंसानियत का खून ही इस बार हो गया सराहा गया। शमीम गाजीपुरी ने उनकी जिस सिम्त भी नजर जाए, रोशनी-रोशनी बिखर जाए, हसन सोनभद्र ने कब रहा शाह-ए-सुखन महदूद पैमानों के बीच, गालिबन गालिब रहा गालिब गजल ख्वानों के बीच शेर सुनाया। पंडित प्रेम बरेलवी ने उसकी नजरों में था उतर भी गया, जी रहा हूं मैं और मर भी गया, विकास वर्मा ने मुल्क को तकसीम कुछ शफ्फाफ चोलों ने किया और हमारे आपसी नफरत के बोलों ने किया शेर सुनाया। कलीम दानिश की गजल जैसे सुना है मैंने हुकूमत का फैसला, दिल मेरा कर रहा है बगावत का फैसला और कासिम नदीमी ने फिर न दुनियां से मुझे कोई भी शिकवा होता, काश अपना भी कोई चाहने वाला होता गजल सुनाया। नूरी परवीन ने रुखसत के वक्त एक झलक और देख लूं, महशर में फिर मुझे तेरा दीदार हो न हो गजल पेशकर लोगों को झूमने पर विवश कर दिया।
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