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हाथियों ने तीन लोगों का घर ढहाया, दो लोगों पर हमला

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बभनी। ब्लॉक के सीमावर्ती गाव में छह दिनों से हाथियों के आतंक से ग्रामीण व वन विभाग की टीम का नींद हराम हो गई है। दिन होते ही हाथी जंगलों में छिप जा रहे हैं और रात होते ही झुंड में गांव में घुसकर फसल, घर, मकान को क्षतिगस्त कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत है। मंगलवार की रात्रि में हाथियों का झुंड फिर से डूमरहर और मगरमाड़ गांव में घुस गये। डूमरहर में तीन लोगों उदरशाह, बाल गोविंद तथा जगनरायन का घर गिरा दिया। वहीं 12 लोगों में रामजग, उदर, बालगोविंद, राजो, जगनरायन, उदरशाय, मानशाह, दिलबरन, गोपाल, राम अधीन, प्रजापति, प्रसिद्धन का फसल नुकसान कर दिया। डूमरहर गांव में उत्पात मचाने के बाद हाथियों का झुंड सेमरिया गांव पहुंच गया। सेमरिया गांव में करीब बारह बजे रात अपने भैंसों के खटाल के पास मचान पर सो रहे दो सगे भाइयों को पटक कर घायल कर दिया। पुलिस ने दोनों घायल शोभा यादव, चंद्रिका यादव पुत्र गुलाब यादव को बभनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। जहां दोनों का उपचार चल रहा है। वन विभाग की टीम देर रात तक सैकड़ों ग्रामीणों की मदद से ढोल और बाजे के साथ डटे रहे और हाथियों को गाव से बाहर निकाल कर किसी तरह जंगलों में भगाया। छह दिनों से हाथियों के आतंक से ग्रामीण दहशत में है। जान जोखिम में डाल वन विभाग की टीम के साथ पूरी रात डटे हैं। वन क्षेत्राधिकारी अवध नरायन मिश्रा ने बताया कि रात होते ही गांव में घुस जा रहे हैं और दिन में सीमावर्ती गांव के जंगलों में छिप जा रहे हैं। ग्रामीणों को आग, पटाखा और मिर्च की गंध करने के उपाय बताए गये हैं, जिससे जान माल की सुरक्षा हो सके। हाथियों की संख्या 18-20 होने के कारण खदेड़ने में दिक्कत हो रही है। भोर होते होते हाथियों के झुंड को अम्माझरिया के जंगल में खदेड़ा गया है। सेमरिया गांव के बाद हाथियों का दल सतबहनी गांव में पहुंच गये थे। किसी प्रकार से हाथियों को जंगल की ओर भगाया गया है। लोग शाम होते ही अपने बच्चों को लेकर घर छोड़कर दूसरे घरों में शरण ले रहे हैं। मंगलवार की रात में प्रभारी निरीक्षक अविनाश चन्द्र सिन्हा भी अपने पुलिस फोर्स के साथ डूमरहर, मगरमाड़, रंपाकुरर, बिछियारी गांव में भ्रमण किया। लोगों को एतिहाद बरतने को कहा। बुधवार की सुबह ही वन विभाग की टीम ग्रामीणों की मदद से सुबह से ही हाथियों की तलाश मे जुटी थी। लेकिन दोपहर तक हाथियों का पता नही चल सका था। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि अभी हाथियों का दल अम्माझरिया के जंगल में ही है।
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