जिले में स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं की प्रगति बेहद खराब है। न महिलाओं व बच्चों का समय से टीकाकरण हो पा रहा है और न ही जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाली धनराशि का नियमित भुगतान हो रहा है। बार-बार हिदायतों के बाद भी आयुष्मान कार्ड बनाने की गति भी सुस्त है। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में यह तथ्य सामने आने के बाद डीएम ने कड़ी नाराजगी जताई है। जिम्मेदारों का वेतन रोकते हुए स्पष्टीकरण मांगा है।
कलेक्ट्रेट सभागार में हुई समीक्षा बैठक में आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रगति काफी धीमी होने पर डीएम ने कहा कि इसमें तत्काल सुधार लाएं। अगली बैठक से पहले इसे दुरुस्त कर लें। ऐसा न हुआ तो कड़ी कार्रवाई होगी। गर्भवती महिलाओं की जांच और टीकाकरण की समीक्षा के दौरान म्योरपुर और चोपन सीएचसी की प्रगति बहुत धीमी थी। दोनों सीएचसी के अधीक्षकों के वेतन भुगतान पर रोक लगाने का निर्देश दिया।
जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसव उपरांत दी जाने वाली धनराशि के वितरण में चोपन, नगवां, केकराही की प्रगति धीमी होने पर तीनों चिकित्सा अधीक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा। डीएम ने सुरक्षित मातृ वंदन योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना, फैमिली प्लानिंग, नियमित टीकाकरण के प्रगति की भी समीक्षा की। आमजन को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन तय समय में पूरा करने को कहा। बैठक में सीडीओ सौरभ गंगवार, एसीएमओ डॉ. आरजी यादव, एडीआईओ विनय कुमार सिंह आदि रहे।
मेडिकल कराने के आदेश में संशोधन
मारपीट के मामलों में बिना डीएम और सीएमओ की अनुमति के मेडिकल किए जाने के आदेश में संशोधन किया गया है। अब संबंधित क्षेत्र के पुलिस की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर भी चिकित्सकीय परीक्षण किया जा सकेगा। अगर कोई व्यक्ति सीधे चिकित्सकीय परीक्षण कराना चाहता है तो ऐसे मामलों में डीएम और सीएमओ की अनुमति जरूरी होगी। डीएम चंद्र विजय सिंह ने आदेश का उल्लंघन होने पर संबंधित चिकित्सक के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की हिदायत दी है।