सोनभद्र। जिले के एक हजार से अधिक आबादी वाले सैकड़ों गांव व मजरे ऐसे हैं, जहां पांच दशक पुराने लगे बिजली के खंभे व तार जर्जर हो चुके हैं। कम ऊंचाई पर तार लटकने से घटना होने की संभावना बनी रहती है। ऐसे करीब 466 गांवों को चिह्नित करते हुए वहां के जर्जर व खंभे तार बदलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जल्द ही इन्हें बदल दिया जाएगा। लटकते तारों से भी लोगों को निजात मिलेगी। जिले में कुल 629 ग्राम पंचायतें हैं। किसी ग्राम पंचायत में चार दशक पहले तो किसी गांव में पांच दशक पहले के बिजली के तार एवं खंभे लगे है। कई गांवों में बिजली के तार और खंभे जर्जर हो गए है। ऐसे स्थिति में कभी तार टूटने से तो कभी खंभे टूटने से गांवों में आपूर्ति बाधित रहती है और घटना होने की आशंका बनी रहती है। इस समस्या को देखते हुए विद्युत निगम की तरफ से ऐसे गांवों का प्राइवेट संस्था के माध्यम से सर्वे इसी वर्ष जनवरी माह में शुरू कराया गया। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) से इन कार्यो को कराया जाएगा। पिपरी डिविजन के एक्सईएन शुभेंदू शाह के मुताबिक पिपरी डिविजन के करीब 125 गांव व मजरे सर्वे में चिह्नित किए गए हैं, जहां काम कराया जाना है। शेष गांव राबर्ट्सगंज डिविजन के हैं। इन गांवों के जर्जर तार व खंभे बदलने व नए खंभे लगाए जाने की कार्रवाई शुरू हो गई है। एक्सईएन-विद्युत विभाग राबर्ट्सगंज एसके सिंह ने बताया कि जिले में कुल 466 गांव व मजरे ऐसे चिह्नित हुए हैं, जहां जर्जर तार व खंभे बदले जाने है। एक खंभे से दूसरे खंभे के बीच ज्यादा फासला होने पर वहां भी बिजली का खंभा लगाया जाएगा। प्राइवेट संस्था की तरफ से काम शुरू कर दिया गया है।