खसोनभद्र। नए निकायों के गठन और सीमा विस्तार के बाद जिले की सात ग्राम पंचायतों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। इसके लिए अधिसूचना जारी करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। जो ग्राम पंचायतें पूर्ण रूप से नगरीय क्षेत्र में शामिल हो रही हैं, उन पंचायतों में विकास कार्यों के लिए अब बजट का आवंटन नहीं होगा। जिला प्रशासन की तरफ से शासन में जल्द रिपोर्ट भेजने की तैयारी चल रही है। नगर पालिका परिषद सोनभद्र के विस्तारीकरण का मामला लंबे समय से चल रहा था। नगर में कुल 17 ग्राम पंचायतें पूर्ण एवं आंशिक रूप से शामिल किए जाने का प्रस्ताव भेजा गया था। बीते दिनों शासन स्तर से प्रस्तावित गांवों को नगर में शामिल करने की मंजूरी मिल गई है। जिला प्रशासन की तरफ से तहसील, ब्लॉक स्तर के अधिकारियों के साथ ही संबंधित निकाय के अधिकारियों के साथ विस्तारित क्षेत्र का सीमांकन कराया जा रहा है, जो लगभग पूरा हो गया है। अब अधिसूचना जारी करने की तैयारी चल रही है। ब्लॉक के अधिकारियों के मुताबिक नगरीय क्षेत्र में कम्हारी, बढ़ौली, बिचपई, बभनौली, सहिजन खुर्द, उरमौरा और छपका ग्राम पंचायतें पूर्ण रूप से शामिल की गई हैं। वहीं पकरी ग्राम पंचायत के सिर्फ पकरी राजस्व गांव, रौंप ग्राम पंचायत का सिर्फ घसिया बस्ती, सजौर ग्राम पंचायत का राजस्व गांव सजौर आंशिक रूप से नगर विस्तारीकरण क्षेत्र में शामिल हुआ है। लोढ़ी ग्राम पंचायत का सिर्फ एक या दो वार्ड ही सीमा विस्तार में शामिल हैं। नगर की सीमा में पूर्ण रूप से शामिल ग्राम पंचायतों में मार्च तक सारे लंबित कार्यों को पूरा कराया जाना है। नए वित्तीय वर्ष से ग्राम पंचायतों मे बजट आवंटित नहीं होगा। ब्लॉक स्तर से ग्राम पंचायतों की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को प्रेषित किया जा चुका है। सदर ब्लॉक के एडीओ पंचायत कृपाशंकर शुक्ला का कहना है कि जो ग्राम पंचायत आंशिक रूप से नगर में शामिल हुए हैं, उसके बाद शेष गांवों की आबादी यदि 1000 से अधिक है तो वह ग्राम पंचायत के अस्तित्व में बना रहेगा। बताया जा रहा है कि सजौर गांव नगरीय क्षेत्र में शामिल होने के बाद मझिगांव मिश्र एवं मझिगांव चौबे की आबादी एक हजार से कम हो जाएगी। घुवास खुर्द के शामिल होने के बाद भी घुवास कला की आबादी एक हजार से अधिक बची रहेगी। इन ग्राम पंचायतों में नए सिरे से सर्वे कराया जाएगा। चार प्रांतों से घिरे जिले में मौजूदा समय में 629 ग्राम पंचायतें हैं। इसमें सात ग्राम पंचायतें पूर्ण रूप से नगरीय क्षेत्र में शामिल कर ली गई हैं। इससे अब जिले में ग्राम पंचायतों की संख्या 629 से घटकर 622 ही बचेंगी। बता दें कि इससे पहले जिले में 637 ग्राम पंचायतें थी। आठ ग्राम पंचायतें ओबरा, चोपन, रेणुकूट के विस्तारीकरण और नवसृजित अनपरा, डाला नगर पंचायत के अस्तित्व में आने के बाद कम हो गई थी।