केंद्र और प्रदेश सरकार ने स्वयं सहायता समूह से जुड़ी जिले के करीब 1.35 लाख महिलाओं को लखपति बनाने का निर्णय लिया है। समूह से जुड़ी महिलाओं की वर्ष में कम से कम एक लाख रुपये की आमदनी कराने के लिए जिला प्रशासन की ओर से कार्य योजना तैयार की जाने लगी है। स्वास्थ्य, कृषि, पंचायती राज विभाग, मत्स्य समेत अन्य विभागों से रोजगार मुहैया कराया जाएगा। इसके लिए विकास भवन में सीडीओ की अध्यक्षता में दो दिवसीय अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक एमजी रवि ने बताया कि महिला सशक्तीकरण के तहत स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्यों की आमदनी बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय लखपति दीदी योजना शुरू की गई है। इस योजना से जिले के 11,556 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी करीब 1.35 लाख महिला सदस्यों की आर्थिक स्थितियों में सुधार होगा। समूह की महिलाओं को रोजगार के साथ उद्यमी बनाने की इस योजना को हर तरह की वित्तीय मदद मुहैया कराई जाएगी। लखपति दीदी योजना में प्रत्येक महिला सदस्य की न्यूनतम वार्षिक आमदनी एक लाख रुपये करने का लक्ष्य है। शासन से मिले आदेश के क्रम में विकास भवन में पांच और छह दिसंबर को सीडीओ सौरभ गंगवार की अध्यक्षता में डिस्ट्रिक्ट लाइवलीहुड पोटेंशियल मैपिंग कार्यशाला का आयोजन होगा। उक्त कार्यशाला में सीएमओ, उपायुक्त श्रम रोजगार, जिला कृषि अधिकारी, डीपीआरओ, डीपीओ, मत्स्य अधिकारी, जिला उद्योग अधिकारी, जिला सूचना अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, समस्त बीडीओ, सभी जिला मिशन प्रबंधन (एनआरएलएम) समस्त ब्लॉक मिशन प्रबंधन (एलएच) शामिल होंगे।
स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की वर्ष में कम से कम एक लाख हो इसके लिए सरकार के निर्देश पर पहल शुरू कर दी गई है। कार्यशाला में सीएमओ समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहेंगे। इसके लिए संबंधितों को निर्देशित कर दिया गया है। -सौरभ गंगवार, सीडीओ सोनभद्र।
कम दरों पर मुहैया कराया जाए कर्ज
स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों का केंद्रीय और राज्यों की योजनाओं के अमल में उनका सहयोग भी लिया जा रहा है, ताकि सदस्यों को रोजगार मिल सके । जिला प्रबंधक एमजी रवि ने कहा कि सदस्यों के तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए कई तरह के प्लेटफार्म की सुविधा भी मुहैया कराई जा रही है। आमदनी बढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर पर महिलाओं के प्रयास से चलाए जाने वाले उद्यमों को प्रोत्साहित किया जाता है। इसके लिए उन्हें शुरुआत में बैंकों से जहां कम ऋण मिलता है, वहीं बाद में उनकी साख के हिसाब से ऋण वितरण में लगातार बढ़ोतरी की जाती है।