सोनभद्र। ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में रुचि न लेने वाले ग्राम सचिवों पर डीपीआरओ ने कार्रवाई करते हुए 77 ग्राम सचिवों का वेतन रोक दिया है। सीएम डैशबोर्ड पर समीक्षा में इन सचिवों के प्रभार वाली ग्राम पंचायतों में केंद्रीय वित्त और राज्य वित्त की प्रगति बेहद खराब मिली है। सभी को नोटिस जारी कर तीन दिनों में स्पष्टीकरण देने को भी कहा है। डीपीआरओ की कार्रवाई से विभाग में खलबली मच गई है।
डीपीआरओ नमिता शरण ने बताया कि शासन की प्राथमिकता कार्यक्रम सीएम डैशबोर्ड की समीक्षा में जिले में पंचायती राज विभाग को डी ग्रेड मिला है, यह काफी आपत्तिजनक है। विभाग के प्रपत्र केंद्रीय वित्त एवं राज्य वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायतों को जारी धनराशि के व्यय में ग्राम सचिवों के रुचि न लेने से यह स्थिति बनी है। कई ग्राम पंचायतों में अभी भी 60-70 प्रतिशत तक धनराशि अवशेष है। शासन, मंडल एवं जनपद स्तर पर समीक्षा में विभाग की प्रगति अत्यंत खराब प्रदर्शित हो रही है। विकास कार्यों में रुचि नहीं लेने वाले ऐसे 77 ग्राम पंचायत सचिवों का जुलाई माह का वेतन रोक दिया है। उन्हें तीन दिन में अपना स्पष्टीकरण पेश करने को कहा गया है। साथ ही यह हिदायत भी दी गई है कि 20 जुलाई तक इन मदों में प्रगति सुनिश्चित कराएं। ऐसा न होने पर उनके विरुद्ध अन्य विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
इन सचिवों का रोका गया है वेतन
डीपीआरओ नमिता शरण ने विकास कार्यों में खराब प्रगति को लेकर राहुल सिंह, योगेंद्र प्रताप, राकेश यादव, दिनेश गिरि, सतीश सिंह, सुनील कुमार गुप्ता, उदय प्रताप सिंह, अजय कुमार, मनोज दुबे, राकेश द्विवेदी, संगीता, रामदरश, चारुलता, हेमनाथ शुक्ला, कमलेश भारती, दीपक कुमार, प्रवीण कुमार, प्रमोद कुमार, यशवंत कुमार, अखिलेश यादव समेत 77 ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोका गया है।