सोनभद्र। मुख्यमंत्री के यहां हुई शिकायत और वहां से आए निर्देश के बाद हुई जांच में प्रथमदृष्टया मारकुंडी स्थित विंध्य सेवा समिति के पेट्रोल पंप का डीजल विक्रय लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। समिति के महामंत्री से एक सप्ताह के भीतर लिखित स्पष्टीकरण की भी मांग की गई है। चेताया गया है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर स्पष्टीकरण नहीं मिला तो आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। पिपरी रोड निवासी धरमचंद जायसवाल ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेज आरोप लगाया था कि मारकुंडी में एक बीघा 10 विश्वा की भूमि को विधि विरुद्ध ढंग से वर्ष 2003 में बैनामा कराकर वहां पेट्रोल पंप लगवाया गया है। इस पर विंध्य सेवा समिति की तरफ से किए गए कथन में कहा गया है कि मुख्तार नामा में मिले अधिकारों के तहत ही भूमि संबंधी कार्रवाई की गई है। मामले की सुनवाई कर रहे डीएसओ डा. राकेश कुमार तिवारी ने बताया कि अभिलेखों का परीक्षण में पाया गया कि जिस राजेश कुमार दूबे के नाम भूमि की खतौनी बताई जा रही है कि उस आराजी की जहमीन पर किसी और का नाम दर्ज है और स्थल का पता भी मारकुंडी की बजाय दूसरी जगह का दर्ज है। संबंधित आराजी नंबर का डाटा ऑनलाइन खोजने पर पूरे मारकुंडी में बताई जा रही आराजी नंबर की कोई जमीन ही नहीं पाई गई। इसे लाइसेंस की सेवा शर्तों का उल्लंघन माना गया। डीएसओ डा. राकेश कुमार तिवारी ने बताया कि विंध्य सेवा समिति ने उक्त गलत दस्तावेज का उपयोग करते हुए डीजल/पेट्रोल रिटेल आउटलेट के लिए जिलाधिकारी के स्तर से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया था जो लाइसेंस की शर्त का उल्लंघन और उत्तर प्रदेश हाई स्पीड डीजल आयल एंड लाईट डीजल आयल आदेश 1981 के प्रस्तर आठ के विपरीत है। इ स कारण डीएम की अनुमति के बाद निर्गत डीजल विक्रय लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए समिति के महामंत्री से एक सप्ताह के भीतर लिखित जवाबतलब किया