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Sonebhadra News: दस साल में दस बार छापा, नहीं मिट पाया भ्रष्टाचार का दाग

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कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की कमाऊ कंपनी नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) में भ्रष्टाचार चर्चा में है। आम तौर पर कोयला उत्पादन सहित अनेक क्षेत्रों में उम्दा कार्य के बदौलत सुर्खियों में रहने वाली कंपनी की उपलब्धियों पर दागी अफसरों ने कालिख पोत दी है।
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सीबीआई की हालिया बड़ी कार्रवाई के बाद पिछले सालों में पड़े छापे अब फिर चर्चा में है। दस सालों में हुई कार्रवाई भी अफसरों में खौफ पैदा करने में नाकाम रहींं। पूर्व में हुई कार्रवाई सीबीआई कोर्ट में लंबित हैं।
गत 17 अगस्त से शुरू सीबीआई की दिल्ली टीम की कार्रवाई ने एक ऐसे नेक्सेस को उजागर किया, जिसमें सीबीआई के अधिकारी खुद शामिल रहे। ऐसा पहली बार हुआ है कि सीबीआई को खुद मानना पड़ा कि पहले के मामलों में मन मुताबिक रिपोर्ट लगाने के लिए कोयला क्षेत्र के अधिकारी बिचौलिए के माध्यम से सीबीआई तक पैसा पहुंचाने का काम करते थे।
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हालिया मामले में चार करोड़ नकद बरामद होने और पांच लोगों की गिरफ्तारी के बाद एनसीएल के कई पूर्व ओहदेदार टीम के निशाने पर हैं। इसके पहले के अधिकतर मामले सिविल एवं विद्युत व यांत्रिकी विभाग (ईएंडएम) से जुड़े रहे।
पहली मर्तबा मैटेरियल मैनेजमेंट (एमएंडएम) विभाग के कारनामे सामने आए हैं। एनसीएल का यही वह विभाग है, जो विदेशी व देशी मशीनों से लेकर उनके स्पेयर पार्ट्स की व्यवस्था देखता है। इसका खर्च सालाना अरबों रुपये है।

अब तक हुई सीबीआई कार्रवाई
- 06 अक्तूबर 2023: एनसीएल के ब्लॉक बी परियोजना में सीबीआई महाप्रबंधक सईद गोरी को 13 लाख रुपये नकद के साथ दबोच लिया गया। इसके अलावा कार्यालय और आवास में हुई तलाशी के दौरान करोड़ों की प्रापर्टी के दस्तावेज भी मिले।
- 18 सितंबर 2022: एनसीएल के नेहरू अस्पताल में सीबीआई ने 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते सिविल मैनेजर आर. मीणा को दबोचा लिया। कैंटीन से जुड़े निर्माण कार्य में ठेकेदार से रिश्वत मांगी गई थी।
- 08 अप्रैल 2022: एनसीएल निगाही में स्थित कोल माइंस प्राविडेट फंड आर्गनाइजेशन (सीएमपीएफओ) में सीबीआई ने कार्रवाई किया और निरीक्षक राजेश रंजन रिश्वत लेते हुए दबोचा।
- 19 मार्च 2021: एनसीएल की अमलोरी परियोजना में कोलयार्ड में सीबीआई का छापा पड़ा। सीबीआई की टीम कोल यार्ड में कोयला स्टॉक में हेरीफेरी की शिकायत पर पहुंची थी। कोल यार्ड में अधिक स्टॉक दिखाया गया था। शिकायत थी कि हकीकत में स्टॉक कम है।
- 11 सितंबर 2018: एनसीएल की जयंत परियोजना में वरिष्ठ प्रबंधक शैलेंद्र पसारी को को रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया गया। वरिष्ठ प्रबंधक को एनसीएल की ओर से निलंबित कर दिया गया था।
- वर्ष 2013: एनसीएल के खड़िया सहित अन्य कोयला परियोजनाओं में रियायती डीजल का कामर्शियल उपयोग किए जाने की शिकायत पर सीबीआई की लखनऊ टीम ने छापा मारा था। कई लोगों पर कार्रवाई हुई थी।
- सितंबर 2012: एनसीएल के जलसंस्थान में लखनऊ सीबीआई टीम ने सबार्डिनेट इंजीनियर केएन सामंता को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।
- जनवरी 2011: एनसीएल के विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग में पदस्थ इंजीनियर बंशराज कुशवाहा को सीबीआई लखनऊ टीम ने ठेकेदार से रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा था। इस मामले में इंजीनियर पर कार्रवाई भी हुई थी।

सीएमडी के सचिव का निलंबन तय
कोल इंडिया लिमिटेड के नियमों के मुताबिक कोई भी अधिकारी या कर्मचारी किसी भी आरोप में 48 घंटे से अधिक समय तक पुलिस अभिरक्षा में रहता है तो उसका स्वयं निलंबन मान लिया जाता है। इस नियम के तहत सीबीआई के छापा कार्रवाई के बाद ज्यादातर अधिकारी निलंबित हुए थे। यही नियम एनसीएल सीएमडी के प्रबंधक (सचिवालय)/ पीएस सूबेदार ओझा पर भी लागू होंगे। ओझा के आवास से 3.85 करोड़ रुपये मिलने के बाद सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है।
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