सोनभद्र। जिले में 12 प्रकार के गंभीर संचारी रोगों की सूचना न देने वाले निजी अस्पतालों और पैथॉलाजी सेटरों पर नकेल की तैयारी है। अब उन्हें यूडीएसपी पोर्टल पर हरहाल में डाटा अपलोड करना होगा। ऐसा न करने वालों के खिलाफ विभाग लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई भी करेगा।
आदिवासी बहुल सोनभद्र जिले में बड़े पैमाने पर निजी अस्पतालों और पैथालॉजी सेंटरों का जाल फैला हुआ है। ये सभी अस्पताल जांच के बाद उपचार तो शुरू करते हैं, मगर इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिल पाती है। ऐसे में कई बार गंभीर बीमारियों बीमारियों पर रोकथाम के लिए समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती है।
वहीं शासन को वास्तविक आकड़े नहीं मिल पाते हैं। बार-बार पत्राचार के बाद भी ज्यादातर अस्पताल रिपोर्ट नहीं दे रहे हैं। अब आने वाले दिनों में ऐसे अस्पतालों व पैथालॉजी की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। सभी अस्पतालों और पैथालॉजी को रोजाना यूडीएसपी पोर्टल पर रोजाना के जांच की रिपोर्ट पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। जिसकी शासन स्तर से निगरानी होगी। ऐसे में संचालकों को अपने अस्पताल और लैब को उत्तर प्रदेश सरकार के यूनीफाइड,डीजीज सर्विलेंस पोर्टल ( यूडीएसपी) पर स्वत: पंजीकृत करना होगा। सभी संस्थाओं को अपने यहां की सुविधाओं को एचएफआर आईडी बनाकर उस पर रजिस्टर करना होगा। फिर एचपीआर आइडी पर डाॅक्टर की योग्यता सहित अन्य जानकारी होगी। इसके बाद एचपीआर आइडी और एचएफआर आईडी को आपस में युग्मन किया जाएगा।
12 प्रकार की जांचें सबसे महत्वपूर्ण
वैसे तो कई प्रकार की रिपोर्ट पोर्टल पर दर्ज होनी है। इसके लिए सीएमओ की ओर से संबंधित को निर्देश जारी कर दो दिनों में पोर्टल पर आईडी बनाकर रोजाना रिपोर्ट अपडेट करने का निर्देश दिया है। ऐसा न करने वालों पर कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी। प्रमुख रिपोर्ट में टायफाइड, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनियां, जेई, हेपेटाईटीस, फाइलेरिया, कालाजार, कालरा सहित अन्य शामिल हैं।
सभी को नए पोर्टल पर आईडी बनाकर रोजाना रिपोर्ट दर्ज करने के लिए निर्देशित किया है। कोई गड़बड़ी मिली तो संबंधित सेंटर की जांच और नियमानुसार पंजीकरण को निरस्त किया जाएगा। शासन स्तर पर प्रतिदिन समीक्षा भी होगी। - डॉ. अश्वनी कुमार,सीएमओ।