सोनभद्र। विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा से लैस करने की तैयारी में शासन जुट गया है। इसके लिए सभी माध्यमिक विद्यालयों में कंप्यूटर की उपलब्धता का ब्योरा जुटाया जा रहा है। कहां, कितने कंप्यूटर हैं, शिक्षकों की क्या स्थिति, इन सबका ब्योरा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। जिले में 46 राजकीय माध्यमिक विद्यालय हैं। इनके अलावा 10 शासकीय सहायता प्राप्त और कुल 140 वित्तविहीन विद्यालय हैं। कुछ राजकीय व शासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों को छोड़ दें तो ज्यादातर में कंप्यूटर शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। विद्यालयों में कंप्यूटर अब तक वैकल्पिक विषय के रूप में ही पढ़ाया जाता है। कंप्यूटर के युग में आगे बढ़ने के लिए विद्यार्थियों को निजी केंद्रों पर पहुंचकर कंप्यूटर सीखना पड़ रहा है। वह कंप्यूटर चलाने में दक्ष भी हो जाएं तो उन्हें कोई डिग्री हासिल नहीं होती। उन्हें अलग से कोर्स करना पड़ता है। स्मार्ट फोन, टैबलेट से विद्यार्थियों से लैस कर रही सरकार अब बदलते दौर की जरूरत के मद्देनजर विद्यार्थियों को माध्यमिक स्तर से कंप्यूटर में दक्ष बनाने की तैयारी कर रही है। इसके मद्देनजर शासन ने इस बारे में विद्यालयों से निश्चित प्रारूप पर आधारभूत जानकारी मांगी है। जिले से विद्यालयों के नाम, प्रवक्ता व सहायक अध्यापकों के पद, कंप्यूटर विषय की मान्यता की हाईस्कूल व इंटर स्तर पर स्थिति, लैब की स्थिति, सहित अन्य संसाधनों की जानकारी मांगी गई है। ताकि उसके अनुसार आगे की योजना तैयार हो सके। विद्यालयों से मांगी गई आवश्यक जानकारी मिलने पर कंप्यूटर विषय के शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होगी। माध्यमिक स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र सुमन, खुशबू, दिव्या, रोहन, शशिकांत आदि का कहना है कि विद्यालय में कंप्यूटर की व्यवस्था न होने के कारण काफी समस्या होती है। नौकरी के लिए अंग्रेजी व कंप्यूटर दोनों विषय की पढ़ाई जरूरी है। पब्लिक स्कूलों में प्राइमरी स्तर से ही कंप्यूटर की पढ़ाई शुरू हो जाती है। यूपी बोर्ड के माध्यमिक विद्यालयों में जहां कंप्यूटर विषय पढ़ाया जाता है, वहां अतिरिक्त फीस देनी पड़ती है। इसलिए हर विद्यार्थी चाहते हुए भी कंप्यूटर विषय को नहीं पढ़ सकता है।