अनपरा। देश के क्रिटिकल पाल्यूटेड एरिया में शामिल अनपरा-सिंगरौली परिक्षेत्र में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। आमतौर पर यहां सर्दियों में वायु प्रदूषण का स्तर डेढ़ सौ अधिक बना रहता है। एनजीटी की सख्ती के बाद दीपावली तक स्थितियां ठीक थीं, मगर इसके बाद से ही लगातार प्रदूषण के स्तर में वृद्धि बनी हुई है। शनिवार को दर्ज किया गया प्रदूषण स्तर 154 एक्यूआई तक पहुंच चुका था।
कोयला और बिजली परियोजनाओं के कारण ऊर्जांचल की आबोहवा में प्रदूषण का स्तर हमेशा सामान्य से अधिक रहा है। सर्दियों में वातावरण की नमी के चलते अक्सर स्थिति गंभीर हो जाती है। धूल-मिट्टी के कण वातावरण में ऊपर तक नहीं जा पाते, जिससे बराबर धुंध के रूप में धूल-मिट्टी और कोयले के कण हवा में बने रहते हैं। इसी कारण इसे हाई पाल्यूटेड एरिया में रखा गया और तमाम तरह के प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं। दीपावली पर पटाखों के इस्तेमाल से प्रदूषण स्तर में वृद्धि की आशंका को देखते हुए निगरानी बढ़ी दी गई थी। इसका नतीजा भी अच्छा रहा। अब निगरानी कमजोर पड़ते ही प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। परियोजनाओं से निकलने वाले धुएं और कोयले के कण से बराबर हवा में प्रदूषण का स्तर खतरनाक श्रेणी में पहुंच रहा है। शनिवार को इलाके में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 154 दर्ज किया गया। यह स्थिति तब है, जबकि दिन में अच्छी धूप हो रही है। डॉक्टरों के मुताबिक इस आंकड़े पर प्रदूषण स्तर पहुंचने के बाद सांस लेना भी दूभर हो जाता है।
तापीय और कोयला परियोजनाओं के कारण शक्तिनगर से औड़ी मोड़ और सिंगरौली से अनपरा तक सड़कों पर बेतहाशा धूल, मिट्टी के कण उड़ते रहते हैं। विभिन्न निर्माण कार्यों की धूल से स्थिति असहज हो जाती है। इसके मद्देनजर ही यहां की सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव करते रहने का निर्देश दिया गया, जिससे धूल-मिट्टी के कण नीचे दब जाएं। इसका क्षेत्र में कहीं भी पालन नहीं हो रहा। गाहे-बगाहे कभी कभी पानी का छिड़काव होता है और फिर जिम्मेदार भूल जाते हैं।
बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए परियोजनाओं को नियमित पानी छिड़काव, सड़कों की साफ सफाई आदि के लिए निर्देशित किया जा रहा है। जल्द ही क्षेत्र का भ्रमण किया जाएगा। प्रदूषण नियंत्रण के मानकों की अनदेखी करने वाली परियोजनाओं पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। -डॉ. टीएन सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी।