घोरावल। भरी पंचायत में निराश्रित महिला के साथ अमानवीयता के बाद भी घटना को छिपाने की पूरी कोशिश हुई। पीड़िता को न्याय दिलाने की बजाय लोक-लाज का भय दिखाकर उसे शांत कराया जाता रहा। जबरन महिला से सुलह भी करा दिया गया था। बावजूद अंधविश्वास में जकड़े लोग उसे धमकी भी देते रहे कि अगर उसने फिर से कोई हरकत की तो उसका अंजाम इससे भी बुरा होगा। बार-बार मिल रही धमकियों से आजिज महिला का सब्र टूटा तो हिम्मत दिखाते हुए कोतवाली पहुंच गई।
आदिवासी बहुल इलाकों में जादू-टोने को लेकर लोगों में अंधविश्वास आज भी कायम है। किसी तरह की बीमारी या असामान्य स्थितियों पर समुचित उपचार की बजाय लोग पहले झाड़-फूंक को तरजीत देते हैं। लोगों में जागरूकता की कमी का लाभ ओझा-सोखा भी भरपूर उठा रहे हैं। निराश्रित महिला के साथ हुई घटना में भी ऐसा ही हुआ। पड़ोसी हरी के परिवार में बेटे-बहू की असामान्य स्थिति के लिए उन पर जादू-टोना करने का शक जताते हुए महिला को पकड़ लिया गया। पंचायत में ओझा के कहने पर उसे दोषी भी मान लिया गया और सजा के तौर पर अमानवीय हरकत की गई। हद तो यह रही कि 21 मई को हुई इस घटना के बाद भी पीड़िता को न्याय दिलाने की बजाय लोग उसे ही गलत ठहराते हुए बार-बार शांत कराते रहे। पास-पड़ोस में उसे अन्य लोग भी उसी निगाह से देखने लगे थे। दबाव देकर उससे कहीं शिकायत न करने पर राजी भी कर लिया गया था, मगर बार-बार मिल रही धमकियों और तानों से आजिज होकर महिला ने पुलिस तक जाने की हिम्मत दिखाई।
जादू-टोने के शक में हो चुकी हैं हत्याएं
कोतवाली क्षेत्र के सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में जादू-टोने के शक में हत्या भी हो चुकी है। दो वर्ष पूर्व लचिया गांव में इसी शक में पड़ोसियों ने महिला की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। यह घटना ऐसे वक्त हुई जब कुछ घंटे बाद ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उभ्भा पहुंचने वाले थे। इसी तरह एक अन्य घटना बर्दिया गांव में हुई, जहां जादू-टोने के शक में भिड़े दो पक्षों में एक महिला की जान चली गई।
घटना संज्ञान में आते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपियों के विरुद्ध केस दर्ज किया जा चुका है। उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश भी दी जा रही है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे ओझाओं की भी सूची तैयार की जा रही है, जो लोगों को अंधविश्वास की ओर धकेल रहे हैं। - संजीव कटियार सीओ, घोरावल।