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Sonebhadra News: नेम प्लेट नहीं, पटल प्रभारियों और नोडल अधिकारियों को ढूंढते रह जाते हैं लोग

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अगर किसी काम से सीएमओ कार्यालय जाना हो तो वहां पटल प्रभारियों और नोडल अधिकारियों को ढूंढते रह जाएंगे। कार्यालय में कहीं भी नाम पट्ट अंकित नहीं है। इससे आम जनमानस को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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जिले में 10 सीएचसी, 40 से अधिक पीएचसी और 180 से अधिक स्वास्थ्य उपकेंद्र और हेल्थ वेलनेस सेंटर संचालित हैं। दिव्यांग प्रमाण पत्र, अस्पताल पंजीकरण, आयुष्मान कार्ड सहित आम जनमानस के कई अन्य कार्य भी कार्यालय से संबंधित होते हैं।
टीकाकरण, मलेरिया नियंंत्रण, मातृ -शिशु देखभाल, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, परिवार नियोजन सहित अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी इसी कार्यालय पर होती है।
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बुधवार को कार्यालय की पड़ताल की गई तो सामने आया कि डीपीएमयू में कौन बाबू या नोडल कहां बैठता है इसका कोई विवरण दर्ज नहीं है। कार्यालय के भूतल और पहले तल पर अवर अभियंता कक्ष है। यह अक्सर बंद रहता है।
कमरा नंबर तीन प्रशासनिक अधिकारी कार्यालय में कुछ बाबू बैठे मिले। इस कक्ष में न तो टेबल पर कोई नेमप्लेट लगी थी और न ही पूरे कार्यालय में कहीं विवरण दर्ज मिला। कमरा नंबर चार पर एसीएमओ कक्ष लिखा है।
यहां कौन-कौन एसीएमओ बैठते हैं, इसका विवरण अंकित नहीं था। कमरा नंबर पांच पत्राचार विभाग में भी किसी कर्मचारी का नेमप्लेट या प्रभार का उल्लेख नहीं था। दूसरे तल पर आयुष्मान कक्ष में नोडल अधिकारी, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी, मलेरिया अधिकारी कक्ष की भी कमोवेश ऐसी ही स्थिति रही।
जन सूचना अधिकारी का नाम गलत
मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में बस दो अधिकारियों के नाम ही दर्ज हैं। एक सीएमओ तो दूसरा जन सूचना अधिकारी का विवरण है। जन सूचना अधिकारी का चार्ज डॉ. गुरुप्रसाद से लेकर किसी अन्य को दिया जा चुका है। कई महीने बाद भी उनके नाम में संशोधन नहीं किया गया है। यह स्थिति तब है जब सूचना का अधिकार नियम लागू है।
एक कार्यालय में पीसीपीएनडीटी कार्यक्रम को लेकर कोई डेस्क निर्धारित नहीं है। ऐसे में नोडल अधिकारी के साथ ही कम्प्यूटर ऑपरेटर बहुत कम ही कार्यालय आते हैं।
सीएमओ कक्ष के ठीक सामने प्रशासनिक अधिकारी कार्यालय है। यहां कार्यालय में तैनात कुछ बाबू बैठते हैं। न तो किसी पटल का नाम अंकित है और न ही बाबू का पद और नाम।
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